पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड ने ग्रिड से लुधियाना के धनांसू में हाईटेक साइकिल वैली तक तारों के लिए टावर(खंभे) लगाने शुरू किए तो किसानों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। किसानों ने काम कर रहे लोगों को मौके से वापस भगा दिया। किसानों पीएसटीसीएल के अधिकारियों को कहा कि इस मामले में कोर्ट में मामला चल रहा है। जिस पर अधिकारी ने कहा कि कोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया। एक किसान ने झंडा गाढ़कर कहा ये लो हमारा पक्का स्टे। अब जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक काम होने नहीं देंगे। खंभे लगाने वाली कंपनी ने किसानों के विरोध के बाद पुलिस को मौके पर बुलाया। धनांसू में सरकार ने हाईटेक साइकिल वेली बनाई है और देश की बड़ी कंपनियां वहां अपने यूनिट लगाने की तैयारी कर रही है। यूनिट लगाने से पहले धनांसू इंडस्ट्रियल एरिया को बिजली सप्लाई देने के लिए 1.25 लाख KV की नई लाइन इंस्टॉल की जा रही है। शालू भैणी गांव में बिना नोटिफिकेशन के ला रहे खंभे भारतीय किसान मजदूर यूनियन पंजाब के प्रधान दिलबाग सिंह का कहना है कि सरकार ने बिजली के खंभे लगाने के लिए धनांसू में जमीन अधिग्रहण करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया और शालू भैणी में ऐसा कुछ नहीं किया। दिलबाग सिंह ने कहा कि सरकार एक तो किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दे रही है दूसरा उनका पक्ष भी नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने डीसी से मांग की है कि इसका नोटिफिकेशन जारी करके किसानों को 2024 के नियमों के अनुसार मुआवजा दें। जिस खेत में खंभा लगेगा वो खेत बर्बाद दिलबाग सिंह का कहना है कि जिस खेत में खंभा लगेगा उसके आसपास एक एकड़ जमीन बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने डीसी लुधियाना से मांग की है कि नोटिफिकेशन जारी करके इस पर एतराज मांगे ताकि लोगों को उचित मुआवजा मिल सके। कलेक्टर रेट नहीं इंडस्ट्रियल रेट के हिसाब से दें मुआवजा किसानों ने खंभे लगाने का काम बंद करवाकर सरकार से मांग की है कि उन्हें कलेक्टर रेट नहीं बल्कि इंडस्ट्रियल रेट पर मुआवजा दिया जाए। दिबाग सिंह ने कहा कि इन खंभों से बिजली सप्लाई साथ के धनांसू में बनी इंडस्ट्री के लिए जानी है। इसलिए सरकार किसानों को खंभों के लिए जो जमीन लेनी है उसका मुआवजा इंडस्ट्रियल रेट से तय किया जाए। टकराव रोकने के लिए पुलिस ने रोका काम सूचना मिलने के बाद थाना कुमकलां से पुलिस मोके पर पहंची। किसानों की जिद के बाद पुलिस ने कंपनी के कर्मचारियों के साथ बात की और मामला शांत होने तक काम रोकने को कहा।


