सागवाड़ा नगरपालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में:अंबेडकर भवन और अन्य सरकारी जमीन निजी व्यक्तियों को आवंटित करने का आरोप

सागवाड़ा नगरपालिका एक बार फिर विवादों के घेरे में है। नगरपालिका प्रशासन द्वारा सरकारी जमीनों और अंबेडकर भवन के लिए आरक्षित भूखंड पर निजी व्यक्तियों के नाम ‘भवन निर्माण स्वीकृति की उजरदारी’ (आपत्ति आमंत्रण) जारी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में पालिका के अधिकारियों और कार्मिकों की मिलीभगत के भी आरोप है। डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र खोडनिया ने आरोप लगाते हुए बताया कि वर्ष 2018 में सीएम बजट घोषणा के तहत पुनर्वास कॉलोनी (ब्लॉक-सी) में प्लाट संख्या 8 (साइज 5400 वर्ग फीट) को अंबेडकर भवन के लिए आवंटित किया गया था। इस आवंटन के लिए कडाणा विभाग और जिला कलेक्टर कार्यालय से एनओसी भी प्राप्त हो चुकी थी। तत्कालीन विधायक अनीता कटारा ने 14 अप्रैल को यहां बाकायदा शिलान्यास भी किया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जनवरी माह में प्रतापगढ़ के पारसोला निवासी यूसुफ पुत्र अल्लाबख्श ने इसी प्लाट पर निर्माण स्वीकृति के लिए आवेदन किया और नगरपालिका ने बिना किसी जांच के 30 जनवरी को उजरदारी भी निकाल दी। एक नहीं, दो सरकारी प्लाटों पर नजर धांधली का यह खेल यहीं नहीं रुका। अंबेडकर भवन के पास स्थित प्लाट संख्या 7, जो कि नगरपालिका की खुद की सम्पत्ति है, उस पर भी दिवड़ा छोटा निवासी भूपेंद्र पुत्र शंकरलाल जोशी के नाम की उजरदारी निकाल दी गई। मौके का निरीक्षण किए बिना ही सरकारी संपत्ति पर निजी मालिकाना हक जताने वाली इस प्रक्रिया ने पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, जब इस मामले में जब सागवाड़ा एसडीएम से बात की गई तो एसडीएम ने कहा है कि यह प्रकरण उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आज के दौर में जब सभी जमीनी रिकॉर्ड ऑनलाइन और मैप (Map) के साथ मौजूद हैं। तब मौके पर जाए बिना या डिजिटल रिकॉर्ड जांचे बिना उजरदारी निकालना यह दर्शाता है कि नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितने लापरवाह हैं। इस पूरे मामले में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करने वाला ‘रक्षक’ ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहा है। यह प्रकरण केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं। बल्कि सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और ईमानदारी पर एक गहरा सवालिया निशान है। खेर अब देखने वाली बात होगी। इस पुरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से किया कार्रवाई की जाती है।

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