जिम्बाब्वे में चल रहे U-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले कनिष्क चौहान ने भी अपनी चमक बिखेरी। वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष महात्र की तूफानी पारी के बाद कनिष्क ने भी अपनी ऑलराउंडर प्रतिभा का परिचय देते हुए 20 गेंदों पर 3 चौके और 1 छक्के की मदद से 37 रन बनाए। आखिरी ओवर में कनिष्क ने धुआंधार बैटिंग की। एक छक्के और दो चौके की मदद से टीम का स्कोर 400 पार कराया। इसी की बदौलत भारत ने 50 ओवर में 411 रन बनाते हुए इंग्लैंड को 412 रन का टारगेट दिया। यह इस टूर्नामेंट के इतिहास में फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर है।श् कनिष्क चौहान ने इससे पहले सेमीफाइनल मैच में 2 विकेट लिए थे। क्वार्टर फाइनल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ हुए मैच में कनिष्क चौहान की बदौलत टीम इंडिया जीती और सेमी फाइनल में जगह बना पाई। कनिष्क चौहान ने पाकिस्तान के खिलाफ 29 गेंदों में 35 रन और एक विकेट भी लिया था। इसके लिए उसे प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार मिला था। इस शानदार प्रदर्शन पर कनिष्क चौहान की मां सरीता चौहान कहना है कि उसे अपने बेटे पर नाज है। उन्हें पूरा विश्वास है कि वे कनिष्क बोलिंग में भी अच्छा प्रदर्शन करेगा। IPL में RCB से खेलेगा कनिष्क
16 दिसंबर को 2025 को अबू धाबी में हुई IPL-2026 की मिनी ऑक्शन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 30 लाख रुपए के बेस प्राइस पर कनिष्क चौहान को खरीदा है। कनिष्क दाएं हाथ के बल्लेबाज व ऑफ-ब्रेक स्पिन गेंदबाज हैं। वे इस बार के IPL में RCB की ओर से खेलने वाले हैं। 2024 में इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का मौका मिला
करीब 14-15 साल की तपस्या के बाद कनिष्क को पहली बार इंटरनेशनल खेलने का मौका साल 2024 में मिला। जब अंडर-19 टीम में चयन हुआ। इंग्लैंड की टीम के साथ डेब्यू मैच खेला। कनिष्क ने इंग्लैंड में 5 वनडे मैच खेले, जिनमें 8 विकेट चटकाए। साथ ही 114 रन बनाए थे। इस प्रदर्शन के लिए कनिष्क को बेस्ट ऑल राउंडर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मिला था। सिलसिलेवार पढ़ें…कनिष्क के यहां तक पहुंचने की कहानी 4 साल की उम्र में खेलना शुरू किया: परिवार मूलरूप से झज्जर के कुलाना गांव का कनिष्क के पिता प्रदीप कुमार खेतीबाड़ी करते हैं और माता सरिता गृहिणी हैं। कनिष्क का जन्म 26 सितंबर 2006 को हुआ। वह परिवार के इकलौते बेटे हैं। कनिष्क ने बचपन से ही क्रिकेट में दिलचस्पी दिखाई। 4 साल की उम्र में ही गाजियाबाद में एकेडमी जॉइन की। 8 साल की उम्र में डेरा की एकेडमी में चयन: 8 साल की उम्र में कनिष्क ने सिरसा में ट्रायल दिया। डेरा सच्चा सौदा में फैसिलिटी अच्छी थी, तो वहीं पर कोचिंग रेगुलर कर दी। बेटे की तैयारी के लिए साल 2014 में परिवार ने झज्जर से सिरसा शिफ्ट कर लिया। कनिष्क ने डेरा सच्चा सौदा के शाह जी सतनाम स्टेडियम में क्रिकेट खेलना शुरू किया। साल 2024 में पहली बार इंटरनेशनल स्तर पर मौका: करीब 14-15 साल की ट्रेनिंग के बाद कनिष्क को पहली बार इंटरनेशनल खेलने का मौका साल 2024 में मिला। जब अंडर-19 टीम में उनका चयन हुआ। इंग्लैंड की टीम के साथ डेब्यू मैच खेला। कनिष्क ने इंग्लैंड में 5 वनडे मैच खेले, जिनमें 8 विकेट चटकाए। साथ ही 114 रन बनाए थे। इस प्रदर्शन के लिए कनिष्क को बेस्ट ऑल राउंडर ऑफ द सीरीज मिला। ऑस्ट्रेलिया में मौका मिला: इंग्लैंड के अपने पहले दौरे पर किए प्रदर्शन के आधार पर कनिष्क का चयन ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुआ। फिर चैलेंजर ट्रॉफी और अफगानिस्तान के साथ खेले। उनमें परफॉर्मेंस के आधार पर ही अंडर-19 एशिया कप के लिए टीम में नाम आया। एशिया कप में भी अच्छा प्रर्दशन : कनिष्क ने अंडर-19 एशिया कप के लीग मुकाबलों में पाकिस्तान के खिलाफ बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन किया। 14 दिसंबर को हुए मैच में उनके बल्ले से 46 रन निकले और 3 विकेट भी लिए। हरफनमौला प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार मिला। अब वर्ल्ड कप टीम में चयन के पीछे यह प्रदर्शन आधार बना। मां को क्रिकेट का शौक, खुद खिलाड़ी बनना चाहती थीं। सरिता चौहान को क्रिकेट का शौक
कनिष्क की मां सरिता चौहान बताती हैं मुझे खुद क्रिकेट का बहुत शौक था। कभी खुद के मन में भी इच्छा थी कि क्रिकेटर बनूं। मायका गाजियाबाद में है। इसलिए, कनिष्क जब 4 साल का था, तभी उसे गाजियाबाद में एकेडमी जॉइन कराई। अब तो पूरा परिवार क्रिकेट देखता है। कनिष्क को क्रिकेटर बनाना मेरी इच्छा रही है। मां को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद
कनिष्क की मां सरिता चौहान ने कहा कि पूरा परिवार कनिष्क के वर्ल्ड कप में के फाइनल में पहुंचने पर बहुत खुश है। कनिष्क ने एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन किया और आज वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में भी उम्मीद है कि अच्छा प्रदर्शन करेगा और भारत वर्ल्ड कप जीतेगा। उन्होंने कहा कि आज के मैच में कनिष्क से अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीदें हैं।


