जयपुर ट्रैफिक पुलिस के एक आदेश के बाद विवाद हो गया। ट्रैफिक पुलिस ने अपने आदेश में अम्बेडर सर्किल को पोलो सर्किल लिख दिया था। कांग्रेस नेताओं ने गलती पकड़ सवाल उठाया तो पुलिस ने संसोधित आदेश भी जारी कर दिए। दरअसल, डीसीपी (ट्रैफिक) सुमित मेहरड़ा की ओर से गुरुवार को एक आदेश जारी किया गया था। इसमें स्टेच्यू सर्किल से पोलो सर्किल और पोलो सर्किल से विधानसभा टी-पाइंट तक रोड के दोनों तरफ पूरी तरह नो-पार्किंग स्थल के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। इस रास्ते पर वाहन पार्किल पर ट्रैफिक जाम करने वालों के खिलाफ ट्रैफिक नियमों के तहत कार्रवाई करना बताया गया था। निकालना पड़ा संसोधित आदेश डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरड़ा की ओर से निकले आदेश में अम्बेडकर सर्किल को पोलो सर्किल बताया गया था। पुलिस की आरे से सर्किल के नाम के बदलाव को लेकर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई। अम्बेडकर सर्किल को पोलो सर्किल बताते हुए सवाल उठाकर विरोध दर्ज करवाया। इस विरोध के बाद जयपुर पुलिस की ओर से शुक्रवार शाम संशोधित आदेश जारी किया गया। आदेश में लिखा गया-‘पोलो सर्किल को अम्बेडकर सर्किल पढ़ा जाए।’ डोटासरा बोले- ये कब बना? कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- जयपुर में ‘पोलो सर्किल’… ये कब बना? क्या भाजपा सरकार ने ‘अंबेडकर सर्किल’ का नाम चुपचाप बदलकर ‘पोलो सर्किल’ कर दिया? अगर ये सत्य है.. तो फिर कब और किस आदेश व प्रक्रिया के तहत किया गया? क्या जयपुर नगर निगम, JDA और UDH विभाग ये बताएंगे कि नया नाम किस नक्शे, अधिसूचना और निर्णय के तहत किया गया? और यदि नाम नहीं बदला गया है, तो फिर राजस्थान राजपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज़ में काल्पनिक नाम डालने का दुस्साहस कैसे हुआ? राजपत्र (विशेषांक) में जिस ‘पोलो सर्किल’ का उल्लेख किया गया है, वो न तो जयपुर की जनता और न ही प्रशासनिक अमले ने कभी ऐसे किसी सर्किल को जाना है। ये मार्ग वर्षों से स्पष्ट रूप से स्टैच्यू सर्किल से अंबेडकर सर्किल से विधानसभा टी-पॉइंट जाना गया है। ऐसे में अचानक ‘पोलो सर्किल’ कहां से प्रकट हो गया? ये गंभीर और चिंताजनक प्रश्न है। क्योंकि ये सिर्फ नाम का नहीं, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के सम्मान का सवाल है। अंबेडकर जी जैसे महापुरुष के नाम को मिटाने का षड्यंत्र और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। जूली ने लिखा- ऐसा कोई सर्किल हमने तो सुना नहीं है राजस्थान राजपत्र विशेषांक में अंबेडकर सर्किल को “पोलो सर्किल” कहा जा रहा है, जबकि ऐसा कोई सर्किल हमने तो सुना नहीं है! जिस सर्किल पर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की ऐतिहासिक प्रतिमा स्थापित है, उसके नाम से इस तरह छेड़छाड़ कोई सामान्य भूल नहीं हो सकती। भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी से उन्हें इतनी नफरत क्यों है कि उनके नाम, पहचान और सम्मान को बार-बार चुनौती दी जा रही है। यह संविधान निर्माता के सम्मान पर सीधा हमला है। सरकार को मामले में त्वरित संज्ञान लेना चाहिए l


