छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी और पूर्व आबकारी मंत्री और विधायक कवासी लखमा जमानत पर जेल से बाहर आ गए हैं। उनकी रिहाई के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने लखमा के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उनके साथ संभवत: कोई षड्यंत्र हुआ है। कांग्रेस ने इस मामले में आदिवासी नेताओं को टारगेट करने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर हमला किया है। लखमा ने कहा है कि अधिकारियों ने उनसे हस्ताक्षर करवाए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि कवासी लखमा ने अपने बयान में बताया कि अधिकारियों ने जैसा कहा वैसा ही उन्होंने साइन कर दिया। इससे लगता है कि उनके साथ किसी तरह का षड्यंत्र हुआ है। शर्मा ने कहा कि जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया के अनुसार काम करेगी, लेकिन लखमा के अपने बयान में कहा कि बिना जानकारी के साइन करवाया गया है। अगर कवासी लखमा को पूरी जानकारी दी जाती तो शायद वे ऐसा नहीं करते। उन्होंने कहा कि लखमा के बयान से यही लगता है कि उनके साथ साजिश हुई हो सकती है। आदिवासी नाराज इसलिए डैमेज कंट्रोल कर रही भाजपा विजय शर्मा के बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कवासी लखमा वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और बस्तर सहित पूरे प्रदेश में उनका मजबूत जनाधार है। आदिवासी समाज में उनकी विशेष लोकप्रियता है। शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें शराब घोटाले में फंसाया और एक साल तक जेल में रखा गया, जिससे आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासी नेताओं को टारगेट कर रही है और अब डैमेज कंट्रोल के लिए अलग-अलग नेता बयान दे रहे हैं।


