चिकित्सीय जांच के बाद ही लोगों को मीट उपलब्ध कराने के आदेश के बाद भी शहरवासियों को अवैध रूप से मीट काट कर परोसा जा रहा है। केंद्र व राज्य सरकार के 19 करोड़ के फंड से 2021 में बना स्लॉटर हाउस शोपीस बन कर रह गया है। इसको बनाने में केंद्र सरकार के 7.93 करोड़ और राज्य सरकार के 11.57 करोड़ खर्च हुए थे। निगम ने टेंडर कर इस स्लॉटरिंग का ठेका कंपनी को दिया। इससे लगा था कि अब जांच के बाद ही मीट की स्लॉटरिंग होगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। निगम क्षेत्र में करीब 5 हजार मीट की दुकानें हैं जिनमें से अधिकांश मीट की दुकानों में अवैध रूप से स्लॉटरिंग कर मीट बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं इसकी गंदगी भी बुड्ढा दरिया में फेंकने को लेकर शिकायत निगम अफसरों को मिलती रहती है। लेकिन निगम अफसर इस पर रोक लगाने में नाकाम साबित हुए हैं। नतीजा ये है कि शहरवासियों को बिना जांच के ही मीट मिल रहा है। दुकानों में अवैध रूप से चिकन-बकरे की स्लॉटरिंग हो रही है। इतना ही नहीं शहर में मछलियों की अवैध रूप से कटाई हो रही है जबकि इस पर पाबंदी है। निगम ने मछलियों की स्लॉटरिंग के लिए भी अलग से कोई व्यवस्था नहीं की है। अब नगर निगम की नींद टूटी है और एक्शन लेने की बात कर रहा है। इसलिए नहीं लाते हैं मीट नगर निगम लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा नगर निगम है। क्षेत्र अधिक होने के कारण यहां चार जोन बनाए गए हैं। सरकारी फंड से सिर्फ एक ही स्लॉटर हाउस बना है जबकि यहां डिमांड और स्लॉटर हाउस की रही है क्योंकि ग्यासपुरा, जमालपुर, चंडीगढ़ रोड से स्लॉटर हाउस तक मुर्गा-बकरा लाने में ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करनी पड़ेगी और समय भी काफी लगेगा। इस कारण मीट की दुकान के संचालक स्लॉटर हाउस तक मुर्गा-बकरा लेकर नहीं जाते हैं। नोटिस जारी करेंगे सरेंडर के लिए लिखा पत्र कंपनी ने स्लॉटर हाउस का कांट्रेक्ट लेने के बाद घाटा झेला है। इसके चलते कंपनी ने इसे सरेंडर करने के लिए मन बना लिया है। कंपनी ने नगर निगम को इस संबंध में पत्र लिखा है। कंपनी ने लिखा है कि वह 2021 से 2025 तक स्लॉटर हाउस संचालित कर रहे हैं और चिकित्सक की भी तैनाती की है। स्टाफ भी बढ़ाया गया है। हर महीने वेतन समेत अन्य खर्चे में 20 लाख रुपये का खर्चा होता है और मात्र 300-मुर्गे और 2-3 बकरे आ रहे हैं जिससे उन्हें खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। मीट बेचने वालों पर निगम नहीं करता कार्रवाई स्लॉटर हाउस शोपीस बना। अयाली में अवैध रूप से मीट काटा जा रहा। हैबोवाल क्षेत्र, हंबड़ा रोड, चंडीगढ़ रोड, दुगरी, माधोपुरी आदि कई इलाके हैं जहां अवैध मीट की दुकानें खुली हैं। इनके द्वारा नियमों की अवहेलना कर कारोबार किया जा रहा है। निगम इक्का-दुक्का दुकानदारों पर चालान की कार्रवाई कर इतिश्री कर देता है जबकि हकीकत में निगम कर्मचारी सख्त एक्शन लेने से बचते रहे हैं।


