वर्तमान में चाईबासा रेलवे स्टेशन से होकर कुल सात यात्री ट्रेनों का होता है आवागमन

भास्कर न्यूज| चाईबासा इन दिनों भारतीय रेल की लेट लतीफी व समय से ट्रेनों के नहीं चलने से चाईबासा-बड़बिल रेल मार्ग के यात्रियों को परेशानी व तनाव की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। वर्तमान में चाईबासा रेलवे स्टेशन से होकर कुल सात यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है। इनमें एक मात्र टाटा-ब्रह्मपुर-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन संख्या- 20891 नियत समय पर चल रही है। इसके अतिरिक्त जितनी भी ट्रेनें इस रूट से गुजर रही हैं, सभी लेट चल रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति टाटा-बड़बिल, हावड़ा जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या- 12021 की है। यह ट्रेन विगत छह माह से काफी विलंब से चल रही है। इस ट्रेन का चाईबासा रेलवे स्टेशन पर आगमन पूर्वाह्न 10.53 बजे व वापसी अपराह्न 3.32 बजे निर्धारित है। किंतु यह ट्रेन रोजाना लेट ही चल रही है। हद तो शुक्रवार 7 फरवरी को हो गई जब ट्रेन रात 1.30 बजे पहुंची व वापसी शनिवार सुबह 6 बजे के आस पास हुई। कोलकाता जाने के लिए इस रूट की यह एक मात्र ट्रेन है। बड़ी संख्या में मरीज, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन लिए छात्र, व्यवसायी वर्ग व हवाई जहाज पकड़ने के लिए लोग इस ट्रेन का सहारा लेते हैं। किंतु ट्रेन की लेटलतीफी के कारण लोग अपने गंतव्य स्थानों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं कार्य भी प्रभावित हो रहा है। रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोगों ने पक्ष-विपक्ष दोनों नेताओं को दम भर कोसते दिखे। उनका कहना था कि आम लोगों की तकलीफ इन्हें दिखाई नहीं दे रही है। कोई इसके लिए आवाज नहीं उठा रहा है। न ही सत्ता पक्ष और न विपक्ष। जब कोई काम हो जाता है तो बस श्रेय लेने की होड़ लग जाती है। मैं दिल्ली से आया हूं। मुझे बड़बिल जाना है। ट्रेन ढाई घंटे लेट है। मैं 1984 से इस रूट पर सफर कर रहा हूं। लेकिन लेटलतीफी इस रूट की नियति शुरू से है। रेलवे को आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर इसमें सुधार करना चाहिए। विपिन पांडे, निवासी-दिल्ली। हावड़ा से ट्रेन 6.20 बजे की जगह 7.30 बजे खुली। यह ट्रेन कब आएगी, कोई ठिकाना नहीं है। हमारे पास विकल्प नहीं है। मजबूरी में सफर करना पड़ रहा है। रेलवे व केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। अभिरूप बनर्जी, निवासी- कोलकाता। आम लोगों से सरकार को कोई लेना-देना नहीं है। इन्हें बस पैसेंजर ट्रेन को रोककर मालगाड़ी पार करवाना है। हमेशा से इस क्षेत्र के लोगों के साथ रेलवे ने सौतेला व्यवहार किया है। प्रवीर सेन शर्मा, चक्रधरपुर। मैं चाईबासा काम से आया हूं। टिकट का पैसा पूरा लिया जाता है तो सर्विस भी पूरी देनी चाहिए। ढाई घंटे लेट हुआ है, इसका हर्जाना कौन देगा। सरकार को आम लोगों की परेशानी के बारे में सोचना चाहिए। अगर सरकार जनता की सुविधा के बारें में नहीं सोचेगी तो दूसरा कौन खोज-खबर लेगा। इंजमामुल, रेल यात्री। रेलवे का यह रवैया ट्रेन बंद करने की साजिश : चाईबासा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे एक यात्री ने कहा कि सीकेपी से होकर एक वंदे भारत ट्रेन हावड़ा तक चलती है, जो नियत समय पर चल रही है। उस ट्रेन का किराया 1085 रुपए है। जबकि जनशताब्दी एक्सप्रेस की एसी कोच का अधिकतम किराया 545 रुपए है। वहीं सामान्य टिकट 155 रुपए में उपलब्ध है। कहीं ना कहीं वंदे भारत ट्रेन को प्रमोट करना और इन ट्रेनों को धीरे-धीरे कर बंद करना। यही प्लानिंग लग रही है। जबकि गरीब वंदे भारत में सफर कर पाने में असमर्थ हैं।

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