रबी: 197.69 हे. रकबे में लगी उद्यानिकी फसलों का 166 किसानों ने बीमा कराया

भास्कर न्यूज | बालोद रबी सीजन में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत 197.69 हेक्टेयर रकबे में लगी उद्यानिकी फसलों के लिए जिले के 166 किसानों ने बीमा कराया है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार पंजीकृत किसानों ने टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज, आलू के लिए बीमा कराया है। खरीफ की तुलना में पंजीयन करवाने वाले 265 किसान कम है। वहीं रकबा मात्र 2.31 हे. कम है। खरीफ वर्ष 2025-26 अंतर्गत पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत 431 किसानों ने 182.45 हे. में लगी 10 फसलों का बीमा कराया था। जबकि रबी सीजन मंे 451 किसानों ने 200 हे. मंे लगी फसल का बीमा कराया था। पिछले साल रबी की तुलना में इस बार बीमा करवाने वाले किसानों की संख्या 285 कम है। हालांकि रकबा मंे मामूली कमी हुई है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार रबी सीजन में औसत 200 से 400 किसान 200 हे. में लगी फसलां का बीमा करवाते हैं। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि खरीफ सीजन 2024-25 में 211.89 हेक्टेयर में लगी टमाटर, केला, पपीता, बैंगन, मिर्च, अमरूद, अदरक के लिए 406 किसानों ने बीमा कराया था। धान की खेती को महत्व कम पंजीयन कराया गया खरीफ सीजन में अधिकांश किसान धान की खेती को महत्व देते है। इस वजह से कम किसान उद्यानिकी फसलों के लिए बीमा करवाते हैं। पिछले दो साल की तुलना में इस बार बीमा करवाने वाले किसानों की संख्या कम है। पिछले साल जिले के इच्छुक ऋणी एवं अऋणी किसानों के लिए पहले टमाटर, बैगन, अमरुद केला, पपीता मिर्च एवं अदरक उद्यानिकी फसलों का बीमा कराने 31 जुलाई तक समय निर्धारित हुआ था। जिसके बाद अगस्त तक मौका दिया गया था। हर साल अतिरिक्त मौका दिया जाता है बावजूद कम रकबे में उद्यानिकी फसल की खेती होने से कम किसान ही बीमा करवाते हैं। उद्यानिकी विभाग के अनुसार फिलहाल बीमा कराने के लिए पोर्टल लॉक हो चुका है। आगे पोर्टल खुलेगा या नहीं, इस संबंध में शासन स्तर से निर्णय लिया जाएगा। इस योजना के तहत गाइडलाइन जारी हुआ था कि अगर अऋणी किसान बीमा करवाना चाहते है तो घोषणा पत्र के साथ फसल बुआई प्रमाण-पत्र या प्रस्तावित फसल बोआई का स्वघोषणा पत्र सहित संबंधित अन्य अनिवार्य दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। चयनित उद्यानिकी फसलों का बीमा कराए जाने के लिए किसानों को उन फसलों के लिए निर्धारित ऋण मान का 5 प्रतिशत प्रीमियम राशि के रूप में देना होगा। शेष प्रीमियम की राशि 50-50 प्रतिशत राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के माध्यम से दी जाएगी।

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