भास्कर न्यूज | अमृतसर कांग्रेस से बर्खास्त किए जाने के बाद मैडम सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहकर उनका मजाक उड़ाया। उसी पोस्ट में उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार की तारीफ की। मगर गौर करने वाली बात यह रही कि पोस्ट के साथ कुल 10 अकाउंट टैग किए, जिनमें पांच भाजपा और केंद्र सरकार के ही हैं और सिर्फ एक कांग्रेस का। 10 अकाउंट में एक न्यूज एजेंसी, एक पत्रकार के अलावा बीजेपी4इंडिया, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी बीजेपी, बीजेपीपंजाब, पीएमइंडिया, अमित शाह के बाद आईएनसीइंडिया, आपपंजाब और आम आदमी पार्टी शामिल हैं। पहले पोस्ट में कांग्रेस को कोसने के बाद दूसरे पोस्ट में भाजपा के गुण गाए हैं। जो दिखा रहा है कि मैडम सिद्धू का झुकाव भाजपा की ओर है। सिद्धू के बयान पर कांग्रेसियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पूर्व सांसद जसबीर सिंह डिंपा ने कहा कि डॉ. सिद्धू लंबी बीमारी से ठीक तो हो गई लेकिन उनका दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है। जिसे वह कभी रहबर कहा कहते थे अब उनके बारे में इस तरह की बयानबाजी कर रही है। वहीं इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन और कांग्रेसी नेता दिनेश बस्सी ने डॉ. सिद्धू का दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। राहुल जैसा नेता देश में कोई नहीं है। केंद्र सरकार की योजनाओं के संबंध में राहुल गांधी ने जो भी बातें कहीं वो सभी सही साबित हुईं। करीब 2 माह पहले कांग्रेस में सीएम वही बनता है जो 500 करोड़ रुपए की अटैची दे का बयान देकर डॉ. सिद्धू विवादों में आईं। इसके बाद कांग्रेस में घमासान मच गया और विरोधी दलों ने भी कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ने पर 8 दिसंबर 2025 को पंजाब कांग्रेस प्रधान ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। 31 जनवरी को डॉ. सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया । अब 6 फरवरी को कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। बता दें कि सिद्धू ने कुछ माह पहले कहा था कि 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हैं। अमृतसर ईस्ट सीट से लड़ेंगी। गौरतलब है कि अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से खुद नवजोत सिद्धू चुनाव लड़ते रहे हैं। पहले पोस्ट में उन्होंने लिखा- पप्पू ने आखिरकार अपने नाम पर मुहर लगा ही दी। एक ऐसा नेता, जो खुद को ही अकेला ईमानदार और सबसे ज्यादा समझदार मानता है, लेकिन जमीनी हकीकत से अनजान है। लोगों से अपने साथ जुड़ने को कहने से पहले उन्हें अपने तथाकथित समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे ईमानदार रहने को तैयार हैं? क्या वे पंजाब के लिए ईमानदारी से काम करने को तैयार हैं? दूसरे पोस्ट में सिद्धू ने कहा कि बीजेपी ने उनकी काबिलियत को पहचाना और अपने सर्वे के जरिए, बिना किसी दबाव या प्रभाव के, 2012 में उन्हें एमएलए का टिकट ऑफर किया, जबकि वह अस्पताल में काम कर रही थी। उसे सीपीएस हेल्थ बनाया गया, क्योंकि वह डॉक्टर हैं। उसे सच बोलने की पूरी आजादी और ईमानदारी व निष्ठा से काम करने का अवसर मिला। डॉ. सिद्धू को निष्कासित किए जाने पर ईस्ट हलके के कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटे। वहीं जिला शहरी प्रधान सौरभ मदान मिट्ठू ने कहा कि डॉ. कौर धमकी देती थीं कांग्रेस छोड़ देंगी। अब कांग्रेस ने डॉ. सिद्धू को खुद निकाल दिया है। कांग्रेस में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा कि सिद्धू दंपति के जाने से कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं होगा। सिद्धू दंपति लंबे समय से एक्टिव पालिटिक्स से दूर हैं। ऐसे में पार्टी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि डॉ. सिद्धू को ऐसा बयान शोभा नहीं देता। अगर डॉ. सिद्धू पंजाब के मुद्दों को उठाना चाहती हैं तो अलग पार्टी बनाएं न कि किसी दूसरे दल में जाएं।


