प्रॉपर्टी रेवेन्यू में हुआ सरकार को बड़ा नुकसान, पंजाब में 20129 और जालंधर में 1500 डॉक्यूमेंट कम रजिस्टर्ड हुए

वारिस मलिक | जालंधर पंजाब सरकार को प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से मिलने वाले राजस्व में बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि साल जनवरी 2025 के मुकाबले जनवरी 2026 में पंजाब भर में करीब 22 हजार डीड कम रजिस्टर्ड हुई हैं। इसका सीधा असर सरकार के खजाने पर पड़ा है। अकेले जालंधर जिले में ही करीब 1505 रजिस्ट्री कम दर्ज की गई हैं। रजिस्ट्री की संख्या घटने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में मिलने वाला राजस्व भी कम हो गया है। रेवेन्यू विभाग ने पंजाब के सभी जिलों से रिपोर्ट तलब की है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला जैसे बड़े जिलों में भी प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी रही है। सरकार इस गिरावट को कलेक्टर रेट, एनओसी जैसे मुद्दों पर भी विचार कर रही है। एनओसी को लेकर मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है, जिसे लेकर लोग परेशान है। सरकार एनओसी और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और आसान बनाकर प्रॉपर्टी रेवेन्यू को बढ़ाने पर विचार कर रही है। एनओसी की जटिल प्रक्रिया बन रही बड़ी वजह प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) की प्रक्रिया ही रजिस्ट्री कम होने की सबसे बड़ी वजह है। एनओसी के रेट में वृद्धि से लेकर नगर निगम और पुडा में लोग परेशान हुए। कई फाइलें अटकीं जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों ही रजिस्ट्री कराने से बचते हैं। इसके अलावा लगातार कलेक्टर रेट बढ़ाए जा रहे हैं, जोकि बड़ा कारण है। कारण : 9 अगस्त 1995 से अगर पहले की प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड डीड है तो दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए एनओसी से छूट है, लेकिन 1995 के बाद की प्रॉपर्टी के लिए एनओसी अनिवार्य है। हालांकि सरकार ने एनओसी के मामले में एक दिसंबर 2024 से 31 अगस्त 2025 तक एनओसी में बड़ी राहत दी थी। एनओसी के रेट भी लगातार बढ़ रहे हैं। इस कारण लोग प्रॉपर्टी के बजाय गोल्ड, सिल्वर और शेयर मार्केट में भी इनवेस्ट कर रहे हैं।

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