जिले के अरनपुर में उप स्वास्थ्य केंद्र बैंबू स्ट्रक्चर से बना है। यह भी खराब हो गया है। स्ट्रक्चर की दीवार टूट जाने से कपड़ा तानकर वार्ड बनाया है। इसमें ही मरीजों को रखा जाता है। अरनपुर उप स्वास्थ्य केंद्र में एक मात्र एएनएम की नियुक्ति है जो अस्पताल में रहकर इलाज करती है। चारों तरफ से अस्पताल टूटा हुआ है। एक कमरे में लाखों रुपए की दवाई कबाड़ की तरह पड़ी हुई है, अस्पताल में न मरीजों को एडमिट करने की जगह है न दवाओं को रखने की। बस्तर के अस्पतालों में सबसे जरूरी स्नैक बाइट की दवा रखना अति आवश्यक होता है। सर्पदंश के मामले अक्सर सामने आते हैं बावजूद अरनपुर अस्पताल में ये जीवन रक्षक दवा नहीं है। दो दिन पहले ही गीदम ब्लॉक में सर्पदंश से एक बच्ची की मौत हो गई थी, यहां भी हितामेटा उप स्वास्थ्य केंद्र में दवा नहीं थी। अरनपुर भी संवेदनशील क्षेत्र है। यहां आसपास नहाड़ी, पोटाली, अरनपुर में जवानों के कैंप हैं। कभी भी अस्पताल में एमरजेंसी केस आ सकते हैं। नया भवन बन गया पर अधिकारी लोकार्पण की देख रहे राह अरनपुर में बैंबू स्ट्रक्चर वाले टूटे भवन में अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, जबकि अरनपुर में ही नया अस्पताल बन गया है। लोकार्पण नहीं होने से यहां अस्पताल शिफ्ट नहीं किया है। एएनएम आरती मिंज ने बताया अस्पताल चारों तरफ से टूट गया है, सांप, बिच्छू भी अंदर प्रवेश कर जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी डिलीवरी के केसों में हो रही है
दीवार टूटी हुई होने की वजह से गर्भवती की डिलीवरी उनके घर पर जाकर ही करवाई जा रही है, क्रिटिकल केस रेफर कर देते हैं। अरनपुर उपस्वास्थ्य केंद्र के भरोसे अरनपुर सहित मेंडपाल, अचेली, तनेली, पेड़का नहाड़ी, काकड़ी, निलावाया के ग्रामीण पहुंचते हैं। जहां सुविधाओं का अभाव है। वार्ड ऐसा कि मरीज को घंटे भर भी भर्ती नहीं किया जा सकता है। अस्पताल में मात्र एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग संस्थागत डिलीवरी की बात कहता है तो दूसरी तरफ अरनपुर अस्पताल में डिलीवरी करवाने तक कि व्यवस्था नहीं है। पिछले महीने एएनम ने घरों में 3 डिलीवरी करवाई थीं। दंतेवाड़ा। ये है अरनपुर का अस्पताल। दीवार टूटने से मरीजांे को परेशानी हो रही है। परदे लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं कबाड़ की तरह पड़ी दवाइयां।


