हिमाचल के राज्यपाल ने सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति नहीं दी। कांग्रेस सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) समाप्त करने फैसले के विरोध 17 फरवरी को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा था। मगर लोकभवन ने बजट सत्र बुलाने का सुझाव दिया है। राज्यपाल के इस फैसले के बाद लोकभवन और राज्य सरकार में टकराव बढ़ सकता है, क्योंकि राज्य के लिए आरडीजी बढ़ा मुद्दा है। हिमाचल को इससे अगले पांच सालों के दौरान लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होना है। राज्य सरकार बार बार कह रही है कि 16वें वित्त आयोग द्वारा आरडीजी बंद करने की वजह से राज्य की आर्थिक सेहत पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए, सरकार इसे बहाल करने के लिए विधानसभा में चर्चा के बाद प्रस्ताव केंद्र को भेजना चाह रही थी। मगर सरकार के इन तर्कों पर लोकभवन ने आपत्ति जताई। सूत्रों के अनुसार- राज्यपाल का तर्क है कि यह समय बजट सत्र का है और उसी मंच पर सरकार अपना पक्ष रख सकती है। ऐसे में अलग से विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता नहीं है। वहीं सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के हित में आरडीजी पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। आरडीजी ग्रांट 1952 से निरंतर मिल रही थी।


