मां, मामा, भाई को कैंसर से खोया, खुद भी कैंसर से लड़े और जीते, 2018 में मिला कैंसर थेरेपी के लिए नोबल पुरस्कार

डॉ. जेम्स पी. एलिसन, कैंसर थेरेपी में नोबेल प्राइज विजेता कैंसर के इलाज पर रिसर्च मेरे लिए बड़ी बात इसलिए है, क्योंकि मैंने अपनी मां को 10 साल की उम्र में कैंसर के कारण खोया था। दो मामा और भाई की मृत्यु भी कैंसर से हुई। मैं खुद प्रोस्ट्रेट कैंसर से लड़ा और जीता। शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को समझने का कौतूहल था। मैंने कैंसर का इलाज ढूंढ़ने के लिए नहीं बल्कि इम्यून सिस्टम की वर्किंग को समझने के लिए चूहों पर शोध किया। लंबी रिसर्च के बाद साबित किया कि इम्यूनोथेरेपी से सभी तरह के कैंसर का इलाज संभव है। कैंसर के इलाज के अलावा हमारे इम्यून सिस्टम पर ऐसी रिसर्च हो रही है, जिससे ऑटोइम्यून डिजीज, डायबिटीज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो सकेगा। कैंसर से लड़ते हैं हमारे टी-सेल्स हमारे ब्लड में खास तरह के वाइट ब्लड सेल्स होते हैं, जिन्हें टी-सेल्स कहते हैं। ये शरीर में हमला करने वाले कैंसर, बैक्टीरिया और वायरस को पहले ही पहचान लेते हैं। इनकी सतह पर एक प्रोटीन होता है, जो इन हमलावरों से चिपक जाता है। कुछ और प्रोटीन एक्सीलरेटर का काम करते हैं। सेल्स को इनसे लड़ने के लिए सक्रिय करते हैं, लेकिन एक खास प्रोटीन CTLA-4 (साइटोटॉक्सिक ल्यूकोसाइट एंटीजन) प्रतिरोधकता पर ब्रेक की तरह काम करती है। यह हमारे शरीर का एक चैक पॉइंट होता है। कैंसर होने पर टी- सेल्स की सतह पर चिपका यह प्रोटीन हमारे इम्यून सिस्टम पर ब्रेक लगा देता है, जिससे वे इन हमलावरों को नहीं रोक सके। तब मैंने ऐसी एंटीबॉडी की खोज की जो इस ब्रेक को ही ब्लॉक कर दे और टी -सेल्स सैनिक बनकर इम्यून सिस्टम को बचाने का काम करते रहे। रेडिएशन या केमिकल नहीं, शरीर का इम्यून सिस्टम कैंसर से लड़ता है रेडिएशन या केमिकल से ट्यूमर के हर सेल को नष्ट करने की जगह इम्यूनोथेरेपी आपके इम्यून सिस्टम के जरिए कैंसर के सेल्स पर आक्रमण करती है। इस रिसर्च से इपीलिमुमैब जैसी दवा पहली बार विकसित हो सकी। कैंसर के इलाज में रेडिएशन, कीमोथेरेपी, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी एक साथ बेहतर काम करती है। हालांकि इम्यूनोथेरेपी इन तीनों को रिप्लेस नहीं कर सकती, लेकिन जिनको रेडिएशन या कीमोथेरेपी देना संभव न हो, उन्हें इम्यूनोथेरेपी दी जा सकती है। इम्यूनोथेरेपी में 4 डोज जरूरी, एक वैक्सीन अभी 20 लाख तक की लागत और अन्य वैज्ञानिक कारणों से इम्यूनोथेरेपी वैक्सीन की अमेरिका में कीमत 10 से 20 लाख रु. है। साल में 4 वैक्सीन की डोज लेनी होती है। उम्मीद है कि जयपुर में जब यह बनने लगेगी तो कीमत कुछ हजार डॉलर तक लाना मुमकिन हो सकेगा। डॉ. एमएल स्वर्णकार इसे 25 हजार रुपए की लागत तक लाने की कोशिश कर रहे हैं। 21 लोगों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है। अच्छी बात यह है कि ट्रायल भारत में ही हो रहा है। इससे कैंसर पेशेंट के ब्लड सेल्स और उससे वैक्सीन बनाना आसान हो जाएगा। कैंसर से बचने के लिए खुद से प्यार करें, मॉडरेशन का नियम अपनाएं कुछ कैंसर जैसे कोलन या पाचन तंत्र के निचले हिस्से में पॉलिप्स होने के जोखिम को इम्यूनोथेरेपी से कम किया जा सकता है। कैंसर का सबसे बड़ा बचाव है सही डाइट, एक्सरसाइज, तंबाकू और फैट से परहेज। जब आप जरूरत से ज्यादा कुछ नहीं करेंगे तो कैंसर से खुद को बचा सकते हैं। खुद से प्यार करें, अपने शरीर की सुनें और कैंसर से डरें नहीं क्योंकि कैंसर से आजादी संभव है। -जैसा महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में मंगलवार को ट्रांसलेशनल कैंसर रिसर्च एंड इम्यूनोथेरेपी पर वर्ल्ड कांग्रेस में आए डॉ. एलिसन ने प्रेरणा साहनी को बताया। कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी का सक्सेस रेट 40% है इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज के बाद भी काम करती है। जैसे ही कैंसर सेल्स लौटते हैं, इम्यून सेल्स उन्हें नष्ट कर देते हैं। एडवांस स्टेज के कैंसर (मेलानोमा) के 20% पेशेंट्स इम्यूनोथेरेपी के बाद 3-10 साल तक जीवित रहे। ब्लैडर और किडनी के कैंसर में यह दर 30 से 40% है। मेरी पहली पेशेंट शैरॉन बेवलिन को 22 साल की उम्र में ऐसा कैंसर हुआ था। उसकी सगाई हो चुकी थी और तभी कैंसर का पता चला। मृत्यु निश्चित थी। इम्यूनोथेरेपी से कैंसर सेल्स पूरी तरह खत्म हो गए। इस थेरेपी से उसके मन से यह डर निकल गया कि कैंसर फिर लौटेगा और उसे मार देगा। इस पहली सफलता ने मुझे बहुत हौसला दिया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *