युवती को पीटने वाले भाजपा नेता की जमानत याचिका खारिज:सतना में गोदाम पर बुलाकर पीटा; मां और भाई को भी मारा

सतना में नागौद के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार शर्मा की अदालत ने भाजपा नागौद मंडल अध्यक्ष पुलकित टंडन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। टंडन पर एक युवती से छेड़छाड़ और बेरहमी से मारपीट करने का आरोप है। अदालत ने प्रभावशाली आरोपी द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 27 जनवरी की रात की है। आरोपी ने युवती को रात करीब 10 बजे अपने सूने गोदाम में मैनेजर से एक ग्राहक के मेकअप से जुड़ी बात करने के बहाने बुलाया था। युवती के वहां पहुंचने पर आरोपी शराब के नशे में था। विरोध पर की गई मारपीट, मोबाइल तोड़ा
अभियोजन का कहना है कि युवती जब वापस जाने लगी तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया। विरोध करने पर आरोपी ने उसकी बेरहमी से पिटाई की और मोबाइल फोन तोड़ दिया। बीच-बचाव के लिए पहुंची युवती की मां और भाइयों के साथ भी आरोपी ने मारपीट की। वीडियो सामने आने पर कार्रवाई
घटना के बाद पीड़िता नागौद थाने पहुंची, लेकिन महिला अपराध होने के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अगले दिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 115(2), 351(3), 324(4), 3(5) और 74 के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी की शिकायत पर पीड़िता पक्ष पर भी केस
अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस जहां आरोपी को फरार बताती रही, वहीं घटना के आठवें दिन आरोपी की शिकायत पर पीड़िता, उसकी मां और दो भाइयों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 115(2), 118(1), 351(3) और 3(5) के तहत क्रॉस केस (क्राइम नंबर 107/26) दर्ज कर लिया गया। अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि फरार आरोपी ने थाने पहुंचकर शिकायत कैसे दर्ज कराई और उसे उसी समय गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर जब्ती पर सवाल
अधिवक्ता ने बताया कि वायरल वीडियो आरोपी के गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे का है। आरोपी ने भी अपनी अग्रिम जमानत याचिका में गोदाम में 8 सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद पुलिस के विरोध प्रतिवेदन में न तो फुटेज का जिक्र है और न ही डीवीआर की जब्ती दर्शाई गई है। कोर्ट ने जताई साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका
अदालत ने अपने आदेश में माना कि आरोपी प्रभावशाली है और अग्रिम जमानत मिलने पर साक्ष्य प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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