शहर में गरीब तबके और मलीन बस्तियों में रहने वाले 7 से 16 साल तक के मासूम ड्रग एडिक्ट (नशे की लत) हो रहे हैं। नशे के लिए सड़कों पर भीख तक मांग रहे हैं, पैसा नहीं मिलने पर चोरी भी कर रहे हैं। गांजा और चरस के अलावा व्हाइटनर, थिनर, तारपीन, पंचर बनाने में उपयोग होने वाले सॉल्यूशन, पेन रिलीफ क्रीम, कफ सीरप और पेट्रोल संघ कर भी नशा कर रहे हैं। खास बात, लड़कों के अलावा कम उम्र की लड़कियां भी ऐसे नशे कर रही हैं। जिला प्रशासन के भिक्षुक मुक्त अभियान में रेस्क्यू किए बच्चों की रिसर्च में यह बात सामने आई है।
भीख मांगते रेस्क्यू किए करीब 100 में 60 से अधिक मासूम नशे की हालत में मिले। दैनिक भास्कर ने अभियान की टीम के साथ करीब एक महीने तक ऐसे बच्चों पर नजर रखी, जिसमें चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। भास्कर ने कुछ बच्चों के चेस्ट एक्स-रे करवाए और एक्सपर्ट से जांच कराई। कुछ बच्चों के चेस्ट में इन्फेक्शन भी मिला है। बस्तियां तो ठीक भास्कर की पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि शहर के बड़े स्कूलों के बच्चों तक ई सिगरेट और हुक्का जैसी नशीली साम्ली पहुंच रही हैं। 15 इलाकों की बस्तियों में नशे की लत
जिला परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा के मुताबिक, बंबई बाजार, चंदन नगर, मच्छी बाजार, अहीरखेड़ी, हवा बंगला के पास नाथ मोहल्ला, मूसाखेड़ी, निरंजनपुर, द्वारकापुरी, प्रजापत नगर, खजराना, गूसाखेड़ी, चोइथराम मंडी, कनाड़िया, गांधी नगर सहित अन्य इलाकों की बस्तियों के आसपास मिले 7 से 16 साल तक के बच्चे नशे की हालत में मिले। कुछ बच्चों के परिजन या रिश्तेदार ही उन्हें नशा करवाकर भीख मंगवाते मिले। केस 1 13 साल की बच्ची से मिला 100 ग्राम गांजा 56 दुकान क्षेत्र से पिछले
दिनों 13 साल की लड़की को भीख मांगते रेस्क्यू किया। जब रेस्क्यू टीम ने उसे पकड़ा तो अत्यधिक नशे में थी। उसके पास करीब 100 ग्राम गांजा मिला। घर का पता भी नहीं बता पा रही थी। कुछ माह पहले संस्था लोक बिरादरी ने 16 साल के एक लड़के को रेस्क्यू किया था। उसे थिनर, व्हाइटनर, अल्प्राजोलम, गांजे की लत थी। केस 2 पंचर बनाने की ट्यूब से नशा करते मिली लड़कियां
कनाड़िया क्षेत्र में 10 और 12 साल की दो लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था, चौराहे के पास भीख मांग रही थी। टीम ने पकड़ा तब दोनों की आंखे बिल्कुल लाल थी, ठीक से बोल भी नहीं पा रहीं थी। उनके पास से कपड़े की छोटी-छोटी पोटली मिली। इनमें में टायर के पंचर बनाने में उपयोग होने वाले सॉल्यूशन बड़ी मात्रा में था और वह उसे सूंघ कर नशा कर रही थी। केस 3 भाई-बहन दोनों साथ कर रहे थे नशा
अहिरखेड़ी में रहने वाला 10 साल का लड़का और उसकी 8 साल की बहन को टीम ने राजबाड़ा के पास किशनपुरा पुल से भीख मांगते रेस्क्यू किया। दोनों से पंचर बनाने में उपयोग सॉल्यूशन का एक ट्यूब, एक छोटी पानी की बोतल में थिनर और कपड़े की पोटली मिली। टीम को पूछताछ में दोनों ने बताया, संघ कर नशा करते हैं। लंबे समय से यह चल रहा है। …और इधर ये भी बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी पहुंच रही ई-सिगरेट
गरीब तबके और मलीन बस्तियों के बच्चों के अलावा बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी नशा पहुंच रहा है। सीबीएसई स्कूलों के सहोदय ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय मिश्रा ने बताया, अधिकांश स्कूलों में समय-समय पर बच्चों के स्कूल बैग्स की वैकिंग होती है। शिक्षकों और प्रिंसिपल्स का कहना है, बैग्स में कई बार ई-सिगरेट और हुक्का जैसी सामग्री मिलती है। कई बार बड़ी मात्रा में नकद राशि भी मिलती है। अन्य शहर-गांव से पढ़ने आने वाले बच्चे होस्टल में रहते हैं, इनके आसपास भी नशे की लत लगाने वाली गैंग सक्रिय रहती हैं।


