आरबीएम के पास स्थित बीएससी नर्सिंग कॉलेज की 3.25 करोड़ रुपए की लागत से बिल्डिंग तो नई बना दी गई है और दिसंबर 2021 में कॉलेज खोल दिया गया। कॉलेज को खुले 4 साल हो गए हैं और 4 बैचों में 240 स्टूडेंट्स ने नीट यूजी परीक्षा के जरिए एडमिशन ले रखा है। परंतु कॉलेज में न कोई प्रोफेसर है और न ही एसोसिएट व अस्सिटेंट प्रोफेसर है और ट्यूटर के 16 स्वीकृत पदों में से ड्यूटी पर सिर्फ एक ट्यूटर ही है और एक अन्य ट्यूटर एक साल के लिए ट्रेनिंग के नाम पर छुट्टी पर है। ऐसे में कोर्स पूरा नहीं होने से स्टूडेंट्स का भविष्य अंधकार में है। बीएससी नर्सिंग कॉलेज में स्टाफ नहीं होने व अन्य कमियों की वजह से इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) की मान्यता भी नहीं मिली है। यहां तक कि परीक्षा के लिए वीक्षक भी नहीं मिल रहे हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेस (आरयूएचएस) ने बीएससी नर्सिंग कोर्स के द्वितीय व तृतीय सेमेस्टर की जनवरी माह में तीन परीक्षाएं पेपर लीक होने की वजह से रद्द कर दी थीं, जो अब के 11, 13 व 15 फरवरी को चल रही हैं। इन परीक्षाओं के लिए वीक्षक तक नहीं मिल रहे हैं। परीक्षाओं में वीक्षक के लिए प्रिंसीपल मोहन सिंह मीणा ने आरबीएम अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, नर्सिंग अधीक्षक को लिखा है, लेकिन वीक्षक नहीं मिलने पर अब सीएमएचओ को भी लिखा है। वहीं कोर्स पूरा कराने के लिए एसजेपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल से बीएससी नर्सिंग योग्यता धारी कार्मिकों की िडमांड की है, लेकिन वह भी अभीतक नहीं मिले हैं। बीएससी नर्सिंग कॉलेज में स्टाफ नहीं होने व अन्य कमियों की वजह से इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) की मान्यता भी सितंबर 2024 में कैंसिल हो चुकी है। हर साल आईएनसी की मान्यता ली जाती है, लेकिन इस बार अभी तक मान्यता नहीं है। इसकी मान्यता के बिना यहां से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को विदेश में नौकरी नहीं मिल सकेगी, हालांकि अपने-अपने प्रदेश में नौकरी कर सकेंगे।


