जैसलमेर जिला जेल में बदलाव की बयार:नवनियुक्त उपाधीक्षक सुथार ने संभाला पदभार, बोले- ‘जेल को सुधार गृह बनाना प्राथमिकता’

जैसलमेर जिला कारागृह में प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही अब व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुधारोन्मुख बनाने की कवायद तेज हो गई है। नवनियुक्त कारागृह उपाधीक्षक मुरली मनोहर सुथार ने अपना कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद सुथार जेल की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के साथ-साथ बंदियों के मानवीय अधिकारों और उनके भविष्य के पुनर्वास को लेकर गंभीर नजर आए। जेल प्रशासन को दिए कड़े निर्देश जिला कारागृह पहुंचने पर जेल स्टाफ द्वारा नवनियुक्त उपाधीक्षक का स्वागत किया गया। पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी होते ही सुथार ने सीधा मोर्चा संभाला और जेल परिसर का निरीक्षण किया। इसके तुरंत बाद उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों और प्रहरियों की एक आवश्यक बैठक बुलाई। बैठक में सुथार ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के राशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और मुलाकात कक्ष की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जेल मैनुअल के नियमों का पालन करने के सख्त निर्देश दिए। केवल निगरानी नहीं, अब ‘रिफॉर्म’ पर फोकस मुरली मनोहर सुथार ने कार्यभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि कारागृह को केवल ‘कैदखाना’ कहना उचित नहीं है, बल्कि इसे एक ‘सुधार गृह’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सुथार ने जेल स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा: “हमारा काम केवल बंदियों को चारदीवारी के पीछे रखना नहीं है। हमारा असली उद्देश्य यह होना चाहिए कि जब कोई बंदी सजा काटकर बाहर निकले, तो वह अपराध की दुनिया छोड़ समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बने। इसके लिए सुधार और पुनर्वास के सकारात्मक प्रयास पहले दिन से शुरू किए जाएंगे।” सुरक्षा, अनुशासन और संवेदनशीलता का त्रिकोण उपाधीक्षक ने जेल प्रशासन के लिए तीन मुख्य बिंदुओं—सुरक्षा, अनुशासन और मानवीय व्यवहार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन बंदियों के साथ मानवीय व्यवहार में कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और जेल प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। पुनर्वास के लिए शुरू होंगे नए कौशल विकास कार्यक्रम सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जैसलमेर जिला कारागृह में बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग शिविर, आध्यात्मिक सत्र और उनके आर्थिक स्वावलंबन के लिए कौशल विकास के नए कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। सुथार का मानना है कि यदि बंदी जेल के भीतर कोई हुनर सीखता है, तो रिहाई के बाद उसके दुबारा अपराध की ओर मुड़ने की आशंका कम हो जाती है। कर्मचारियों को दिया सेवा का मंत्र उपाधीक्षक ने सभी जेल प्रहरियों और कार्मिकों को कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक प्रहरी का कार्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यदि इसे संवेदनशीलता के साथ किया जाए तो यह समाज सेवा का एक बड़ा माध्यम बन सकता है।

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