बुधवार को अशोकनगर के श्री युगल सरकार मंदिर में संत रविदास जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। श्री युगल सरकार श्रीमदभगवद्गीता स्वाध्याय सेवा समिति के सदस्यों ने ब्रह्ममुहूर्त में ऋषि स्नान और योगाभ्यास के बाद भक्तियोग का पाठ किया। इस दौरान संत रविदास जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पण कर उनका जीवन परिचय पढ़ा गया। गीता व्रती रामबली ने बताया कि संत रविदास का जन्म काशी में संवत 1433 में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनके पिता का नाम संतोख दास और माता का नाम कलसा देवी था। उनकी पत्नी लोना देवी थीं। जूता बनाने का काम करने वाले संत रविदास जी अपना कार्य पूरी निष्ठा और समयबद्धता से करते थे। संत रविदास ने अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने लोगों को धार्मिक आडंबरों से दूर रहने का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी प्रासंगिक है, जो मन की पवित्रता पर बल देता है। वे अत्यंत परोपकारी और दयालु स्वभाव के थे। साधु-संतों को निशुल्क जूते भेंट करना उनकी आदत थी। उनके इस स्वभाव से उनके माता-पिता नाराज रहते थे और अंततः उन्होंने रविदास जी और उनकी पत्नी को घर से निकाल दिया। लेकिन इससे उनके जीवन के उद्देश्य पर कोई असर नहीं पड़ा। वे पड़ोस में रहकर अपना व्यवसाय करते रहे और शेष समय ईश्वर-भजन और सत्संग में व्यतीत करते रहे।


