बूंदी जिले की डाबी उपतहसील के भवानीपुरा गांव का प्राथमिक स्कूल बदहाली का शिकार है। एक ओर जहां सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ का नारा दे रही है, वहीं इस स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां पढ़ने वाले आदिवासी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। स्कूल की संस्था प्रधान पूजा वर्मा ने बताया कि पूरे स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। एक ही कक्षा कक्ष में बच्चों को पढ़ाया जाता है और उसी में मिड-डे मील भी तैयार किया जाता है। धुएं और शोर के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों और सुतड़ा ग्राम पंचायत को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावकों और छात्रों के अनुसार स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। स्कूल की चारदीवारी भी टूटी हुई है, जिससे आवारा पशुओं का परिसर में प्रवेश बना रहता है। सड़क से नीचे होने के कारण बारिश के मौसम में स्कूल परिसर में 5-6 फीट तक पानी भर जाता है। छात्रों ने बताया कि स्कूल में पंखे तक नहीं हैं और छत कभी भी गिर सकती है, जिससे उन्हें डर लगता है। छात्र प्रवेश भील ने कहा, “छत कभी भी गिर सकती है, हमें डर लगता है।” पीने के पानी के लिए केवल 500 लीटर की एक प्लास्टिक की टंकी है। भीषण गर्मी में इसका पानी इतना गर्म हो जाता है कि बच्चों को वही पानी पीने पर मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा स्कूल परिसर में बना आंगनबाड़ी केंद्र (टीन शेड) भी पिछले दिनों आए तूफान में क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे छोटे बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल की स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। स्थानीय ग्रामीण रामस्वरूप भील, दयाराम, लाला चन्द, और पूर्व फूल चंद भील सहित दर्जनों ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि प्रशासन आदिवासी बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। यदि जल्द ही बजट पारित कर नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया, तो ग्रामीण उग्र प्रदर्शन को मजबूर होंगे।


