एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमडी छात्रों की प्रायोगिक और वाइवा परीक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट इंदौर ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए हैं कि वह कॉलेज से भेजी गई परीक्षक सूची पर शीघ्र निर्णय ले। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वीकृति मिलने के बाद परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी। याचिका में कहा गया था कि कॉलेज प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय की तय प्रक्रिया के विपरीत परीक्षकों का नया पैनल तैयार किया गया और उसी के आधार पर 10 से 13 जनवरी 2026 के बीच प्रायोगिक परीक्षा प्रस्तावित की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इस पैनल और विश्वविद्यालय की स्वीकृति को अवैध बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट भुवन गौतम ने यह भी तर्क दिया गया कि विश्वविद्यालय की अधिसूचना दिनांक 23 फरवरी 2024 के तहत External Examiner Mapping for Practical Exams (MPMSU वेब एप्लीकेशन) – INTELLI EXAMS पोर्टल के माध्यम से परीक्षक सूची और परीक्षा तिथि अपलोड की जानी थी, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। कोर्ट को यह भी बताया गया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, फैक्ल्टी डॉ. शिखा घनघोरिया व अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप की आशंका है। इसके अलावा, एमडी पाठ्यक्रम की तीन वर्षीय अवधि पूरी होने के बाद कुछ छात्रों का स्टायपेंड रोके जाने का मुद्दा भी उठाया गया। गौरतलब है कि 9 जनवरी 2026 को नोटिस जारी करते समय हाईकोर्ट ने 10 जनवरी से प्रस्तावित प्रायोगिक परीक्षा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। बाद में कॉलेज प्रशासन द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी कर प्रकरण विश्वविद्यालय को भेज दिया गया। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि उसकी भूमिका सीमित है और कॉलेज से प्राप्त प्रस्ताव पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। इस पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह अगले दिन तक आवश्यक निर्णय ले। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा संचालन में कॉलेज प्रशासन के किसी भी अधिकारी द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। इन निर्देशों के साथ न्यायालय ने याचिका का निराकरण कर दिया।


