लुधियाना में त्योहार और शौक के नाम पर पिछले दो महीनों में उड़ाई जा रही पतंगें अब लोगों को सीधे अस्पतालों तक पहुंचा रही हैं। सिविल अस्पताल और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज सहित शहर के दस प्रमुख अस्पतालों से की गई बातचीत में सामने आया है कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान पतंगबाजी से जुड़ी चोटों के मामलों में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पतंगबाजी से सिर की गंभीर चोट, रीढ़ की हड्डी को नुकसान, गले पर गहरा कट, चेहरे पर स्थायी निशान और कई मामलों में जान जाने का खतरा भी पैदा हो गया है। डॉक्टरों के मुताबिक यह सिर्फ हादसे नहीं, बल्कि लापरवाही और नियमों की खुली अवहेलना का नतीजा हैं। छतों पर सुरक्षा के बिना खड़े होकर पतंग उड़ाना, बच्चों को अकेला छोड़ देना, और प्रतिबंधित चाइना डोर का खुलेआम इस्तेमाल अब जानलेवा साबित हो रहा है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, लुधियाना में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच पतंगबाजी से जुड़े 20 गंभीर मामले दर्ज किए गए। इनमें 12 मामले ऊंचाई से गिरने के थे, जबकि 8 मामले प्रतिबंधित डोर से कटने के सामने आए। नहीं समझे तो बढ़ेगा खतरा पतंगबाजी के नाम पर कुछ देर के मनोरंजन के लिए अपनी जान जोखिम में डालना बेहद खतरनाक है। चाइना डोर न सिर्फ इंसानों बल्कि पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। अगर अभी भी लोगों ने सावधानी नहीं बरती, तो आने वाले दिनों में हादसों की संख्या और गंभीरता दोनों बढ़ेंगी। पतंग उड़ाना शौक हो सकता है, लेकिन लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। अब फैसला समाज को करना है मजा जरूरी है या जिंदगी। 4 केस से समझें गंभीरता… जिन मामलों ने सबको झकझोरा केस 1: छत से गिरा युवक, सिर में गंभीर चोट :19 साल का युवक छत पर पतंग उड़ाते समय संतुलन खो बैठा और नीचे गिर गया। सिर में गंभीर चोट आने के बाद उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार ऊंचाई से गिरने के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा दिमाग और रीढ़ को होता है और ऐसे मरीजों को लंबा इलाज झेलना पड़ता है। अस्पतालों की सामूहिक चेतावनी इस बार लुधियाना के अस्पतालों में पतंगबाजी के दौरान पहुंचे ज्यादा गंभीर घायल, लापरवाही और नियम तोड़ना निकली वजह पैर में फ्रैक्चर सीने पर लगी चोट टूटी रीढ़ की हड्डी हाथों में आया फ्रेक्चर सख्ती करना हुआ जरूरी डॉ. इंदर पवार, डीन ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, ऑर्थोपेडिक सर्जन केस 3: पतंग लूटते समय बच्चा हादसे का शिकार : 11 साल का बच्चा पतंग पकड़ने के चक्कर में सड़क पर आ गया। तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से उसके हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया। डॉक्टरों ने इसे अभिभावकों की बड़ी लापरवाही बताया और कहा कि बच्चों को बिना निगरानी छोड़ना गंभीर खतरा बन रहा है। केस 2: चाइना डोर से गला गहराई तक कटा : 35 साल का दोपहिया वाहन चालक अचानक सड़क पर चाइना डोर की चपेट में आ गया। डोर सीधा गर्दन में फंस गई, जिससे गला गहराई तक कट गया और तेज खून बहने लगा। समय पर अस्पताल पहुंचने से उसकी जान बच गई, हालांकि गर्दन पर स्थायी निशान रहेगा। केस 4: मुंडेर पर खड़ा युवक फिसला, रीढ़ की हड्डी में चोट : 28 साल का युवक छत की मुंडेर पर खड़ा होकर पतंग उड़ा रहा था। अचानक पैर फिसलने से वह नीचे गिर गया और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आ गई। फिलहाल उसे चलने-फिरने में परेशानी हो रही है और डॉक्टर लंबे रिहैबिलिटेशन की बात कर रहे हैं। लुधियाना के दस अस्पतालों सरकारी, निजी और ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने माना कि इस साल पतंगबाजी से जुड़ी चोटों के मामलों की गंभीरता पहले से कहीं अधिक है। जहां पहले मामूली कट या हल्की चोटें आती थीं, वहीं अब सीधे ऑपरेशन थिएटर तक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पतालों का कहना है कि यह सिर्फ हेल्थ इमरजेंसी नहीं, बल्कि सामाजिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर है। जब तक अभिभावक, युवा और प्रशासन मिलकर सख्ती नहीं करेंगे, तब तक यह आंकड़े और बढ़ेंगे।


