ईश्वर का वास केवल निर्मल हृदय में ही संभव-शून्य प्रभु

भास्कर न्यूज | लुधियाना गोइंदवाल गांव स्थित शनि गांव में साप्ताहिक धार्मिक समागम के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। समागम में गुरु शून्य प्रभु ने जीवन दर्शन का सार साझा किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा का वास केवल निर्मल हृदय में ही संभव है। उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे घर में किसी विशेष अतिथि के आगमन से पहले हम साफ-सफाई करते हैं ठीक उसी तरह यदि हम चाहते हैं कि ईश्वर हमारे हृदय में वास करें तो हमें अपने विचारों और भावनाओं की सफाई करनी होगी। शून्य प्रभु ने आधुनिक जीवनशैली पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा कि आज का मनुष्य अपने भीतर झांकने से डरता है। इंसान अकेला नहीं बैठ पाता जैसे ही वह अकेला होता है मोबाइल, टीवी या अखबार का सहारा ले लेता है। मुख्य सेवादार कर्मजीत सिंह मान की देखरेख में कार्यक्रम की शुरुआत भव्य हवन-यज्ञ से हुई। इसके बाद विशेष आरती हुई और भक्तों ने शनि देव पर तेल अर्पित कर अपने कष्टों के निवारण की प्रार्थना की। समागम के समापन पर अटूट भंडारा बरताया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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