भास्कर न्यूज | लुधियाना दंडी स्वामी महाराज की अपार करुणा और संकीर्तन सम्राट बैकुंठवासी बाऊ मुरलीधर मल्होत्रा एवं जगदीश चन्द्र कोमल के पावन आशीर्वाद से अखिल भारतीय श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल का 37वां वार्षिक दो दिवसीय महा संकीर्तन महोत्सव शनिवार को शुरू हुआ। पं. राजकुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन श्री दुर्गा माता मंदिर भाई रणधीर सिंह नगर में ठाकुर जी का मनमोहक दरबार सजाया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वृंदावन से पधारे वैष्णावाचार्य पुंडरीक गोस्वामी रहे, जिन्होंने अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को भक्ति के वास्तविक मार्ग से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि जब भक्त के हृदय में ठाकुर जी के दर्शन की व्याकुलता बढ़ती है तो सांसारिक मोह खुद-ब-खुद छूटने लगते हैं। जहां अहंकार का अंत होता है, वहीं प्रभु का वास होता है। महोत्सव के पहले दिन देशभर से आए रसिकों की जुगलबंदी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। संकीर्तन का आरंभ गणेश वंदना और महामंत्र जप से हुआ, जिसके बाद कान्हा रे! मेरे मन की मत करियो, हे गिरधर गोपाल मेरो गिरधर गोपाल और जय जय राधा रमण हरि बोल जैसे भजनों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लुधियाना| अखिल भारतीय श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल सेवक सिद्धपीठ द्वारा आयोजित 37वां वार्षिक महा संकीर्तन महोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव के द्वितीय संकीर्तन में डिवीजन नंबर 3 स्थित प्राचीन गौशाला में श्री ठाकुर जी का भव्य दरबार सजाया गया। समारोह में मुख्य आकर्षण वृंदावन से पधारे दैण्यमूर्ति रविनंदन शास्त्री महाराज रहे। शास्त्री ने जब अपनी मधुर वाणी से राधा-राधा की विशेष धुन छेड़ी तो पांडाल में मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। बरेली से आए कोकिल कंठ युधिष्ठिर मलिक और सुनील मिन्टू की जोड़ी ने अपनी गायकी से समां बांध दिया। भक्ति की इस गंगा में सोनीपत से राजीव शास्त्री, अंबाला से विवेक सबलोक और गाजियाबाद से सलिल श्रीवास्तव ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से भक्तों को सराबोर किया। वहीं अमृतसर के आदित्य व राजन बाली और स्थानीय गायक अश्विनी ग्रोवर व प्रिंस छाबड़ा ने भजनों से माहौल को पूरी तरह वृंदावनमय बना दिया। पं. राजकुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस समागम में देर रात तक जयकारे गूंजते रहे। संकीर्तन के दौरान भजनों पर झूमते श्रद्धालु। संकीर्तन के दौरान मौजूद श्रद्धालुओं का हुजूम। संकीर्तन में उपस्थित पं. राजकुमार शर्मा, वैष्णवाचार्य पुंडरीक गोस्वामी व अन्य। इस अवसर पर बरेली से युधिष्ठिर मलिक व सुनील मिन्टू, सोनीपत से राजीव शास्त्री, अंबाला से विवेक सबलोक, गाजियाबाद से सलिल श्रीवास्तव, अमृतसर से आदित्य, जतिन व राजन बाली और लुधियाना से अश्विनी ग्रोवर व प्रिंस छाबड़ा ने अपनी प्रस्तुतियों से पूरे मंदिर परिसर को गोकुलधाम बना दिया। महोत्सव के दूसरे दिन आज 8 फरवरी को भी हरिनाम की गंगा बहेगी। आज प्रातः 10:30 से 1:30 बजे तक तपोस्थली कुटिया श्री दंडी स्वामी नत गांव साहनेवाल में तृतीय संकीर्तन आयोजित होगा। वहीं महोत्सव की अंतिम बैठक शाम 5 से रात 8 बजे तक श्री सिद्धपीठ दंडी स्वामी मंदिर सिविल लाइंस में होगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए बृज मोहन ढींगरा, पं. दीपक शर्मा, संदीप लांबा, सोमनाथ मल्होत्रा, सुरिंदर अरोड़ा, प्रिंस छाबड़ा आदि पदाधिकारी जुटे हुए हैं।


