मध्यप्रदेश में 20 मार्च को होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद हो गया है। इस परीक्षा में संविदाकर्मियों को मिलने वाले 50% आरक्षण और आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट को नजरअंदाज कर दिया गया है। दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने 5 जून 2018 की संविदा नीति को आधार बनाकर नियम बनाए है। जबकि संविदा नीति 2023 में संविदाकर्मियों को 50% आरक्षण और आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का प्रावधान है। नई संविदा नीति को नजरअंदाज करने से लगभग 20 हजार संविदा कर्मचारी परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। प्रभावित कर्मचारियों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय की शिक्षिकाएं, बालिका छात्रावास की सहायक वार्डन, बीआरसी और बीएसी भी शामिल हैं। सभी प्रभावित कर्मचारी डीएड-बीएड सहित आवश्यक योग्यता रखते हैं। अब ये लोग हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी से बढ़ाकर 20 फरवरी कर दी है, लेकिन संविदा कर्मचारियों की मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब नई नीति में पुरानी सभी नीतियों को खत्म किया जा चुका है, तो पुरानी नीति के आधार पर नियमावली तैयार करना नियमों का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले इस परीक्षा में ईडब्ल्यूएस (कमजोर आय वर्ग) के अभ्यर्थियों की अनदेखी का मामला सामने आ चुका है। दो दिन पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आयुसीमा में छूट देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की लापरवाही स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने परीक्षा नियम तैयार करते हुए यह ध्यान ही नहीं दिया कि 22 जुलाई 2023 को नई संविदा नीति लागू हो चुकी है। जिसमें साफ कहा है कि पुरानी सभी नीतियां खत्म की जा चुकी हैं। अधिकारियों ने 5 जून 2018 की नीति के अनुसार नियमावली तैयार कर दी। कर्मचारी कहते हैं कि सामान्य प्रशासन विभाग से छूट लेने की बात है, तो कैबिनेट की निर्णय पर कोई अधिकारी कैसे छूट दे सकता है। विधानसभा में कई प्रश्न लगे हुए हैं
शिक्षक चयन परीक्षा में संविदा कर्मचारियों को आरक्षण एवं आयुसीमा में छूट का लाभ नहीं देने को लेकर कई विधायकों ने विधानसभा प्रश्न लगा दिए हैं। इन प्रश्नों का उत्तर सरकार बजट सत्र में देगी। हालांकि, तब तक परीक्षा शुरू हो चुकी होगी। हाईकोर्ट जाएंगे कर्मचारी
शिक्षक चयन परीक्षा में अनदेखी के विरुद्ध संविदा कर्मचारी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जो नीति समाप्त (अधिक्रमित) हो चुकी है, उसे आधार बनाकर अधिकारियों ने नियमावली कैसे तैयार कर दी।


