पाटन|पाटन प्रखंड के निमियां-टुसरा स्थित सात दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रवचनकर्ता सुश्री मोहिनी किरण शुक्ला दोनों बहनों ने भावपूर्ण संगीतमय कथा के माध्यम से यज्ञस्थल को भक्तिमय बना दिया। कथा श्रवण के लिए आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु यज्ञस्थल पर उमड़ पड़े। कथावाचिका मोहिनी किरण शुक्ला ने प्रवचन के दौरान कहा कि नैमिषारण्य प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल रहा है, जहां 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की और जहां स्वयं श्रीमद्भागवत कथा का उद्गम हुआ। यह स्थल ज्ञान, मोक्ष और पवित्रता का केंद्र माना जाता है। सुश्री मोहिनी किरण शुक्ला ने श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धुंधकारी अपने दुष्ट कर्मों-क्रोध, हिंसा और वेश्यागमन के कारण मृत्यु के बाद भयंकर प्रेत बन गया था, लेकिन अपने भाई गोकर्ण द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से वह नरक की यातनाओं से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हुआ। यह कथा इस सत्य को दर्शाती है कि कोई भी व्यक्ति कितना ही पापी क्यों न हो, यदि वह निष्काम भाव से सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण करता है तो उसे परमधाम की प्राप्ति संभव है। कथा के दौरान संगीतमय भजनों और प्रसंगों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। पूरा यज्ञस्थल हरिनाम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।


