सुगना के आंगनबाड़ी केंद्र में एक ही कमरे में नौनिहालों की पढ़ाई व मरीजों का एक साथ किया जाता है इलाज

भास्कर न्यूज | पाटन पाटन प्रखंड के सुगना गांव में पिछले 25 वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केंद्र) का संचालन किया जा रहा है। भवन की जर्जर स्थिति के कारण एक ही कमरे में बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे दोनों व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इस गंभीर समस्या पर न तो विभाग ध्यान दे रहा है और न ही कोई जनप्रतिनिधि। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। वर्ष 2022 में मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई, जिससे समस्या और भी गंभीर हो गई। केंद्र में न बिजली की सुविधा है, ना पानी की, ना ही शौचालय की और ना ही बच्चों के लिए नल-जल की सुविधा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छोटे-छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र के बगल से नाली के पानी का बहाव होने से दुर्गंध होते रहता है। इस संबंध में कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सह बीस सूत्री अध्यक्ष रामानंद पाण्डेय ने कहा कि लगभग 30 वर्षों से आंगनबाड़ी भवन में ही स्वास्थ्य केंद्र संचालित होना विभागीय उदासीनता को दर्शाता है। भवन की कमी को लेकर कई बार विभाग को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बच्चों के हित को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र अलग भवन में स्थानांतरित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के लिए अलग-अलग भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों सुचारु रूप से संचालित हो सकें। मरीजों को इलाज कराने में परेशानी: केंद्र में तैनात सीएचओ, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका ने बताया कि एक ही कमरे में स्वास्थ्य सेवाएं और आंगनबाड़ी का संचालन होने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं इलाज के दौरान भी अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। आंगनबाड़ी सेविका निशा भारती एवं सीएचओ अनुरूपा एक्का ने कहा कि यहां कार्यरत चारों स्टाफ महिला हैं,यदि विभाग और जनप्रतिनिधि महिला के दर्द को समझते, तो कम-से-कम केंद्र में शौचालय और पानी की व्यवस्था जरूर कर दी जाती।

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