जल्द ही जलमीनारों को शुरू करने की पहल की जाएगी: कार्यपालक अभियंता

भास्कर न्यूज|सेन्हा/कुडू सरकार द्वारा हर घर नल जल योजना के तहत प्रत्येक घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत पूर्व में ही लोगों को इंटक वेल और जलमीनार के माध्यम से पेयजल पहुंचाने को लेकर कार्य किया गया था। जिले के सदर प्रखंड सहित सभी प्रखंडों में ऐसे कई जलमीनार है जो वर्षों पूर्व ग्रामीणों की प्यास बुझाने को लेकर बनाए गए थे। पर आज भी यह जलमीनार खुद प्यासे पड़े है। भले ही इसके लिए विभाग के करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए हो। हालांकि इससे ठेकेदार और संबंधित प्रतिनिधियों को लाभ अवश्य हुआ है। अलग-अलग प्रखंडों में अलग-अलग समय पर जलमीनार का निर्माण कराया गया था। कही ट्रायल के बाद तो कहीं ट्रायल से पहले ही यह बेकार साबित हो गया है। शायद यही कारण है कि आज भी ग्रामीणों को पेयजल के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। नलजल योजना के तहत हाल ही में कई गड़बड़ झाला भी सामने आ चुका है। ऐसे इंटक वेल, जलमीनार और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ हाथी का दांत साबित हो रहा है। कुडू प्रखंड में भी लगभग साढ़े आठ करोड़ की लागत से जलमीनार का निर्माण पांच वर्ष पहले हुआ था। टाटी और कुडू पंचायत के तीन हजार लोगों को वाटर कनेक्शन मिला है। चार साल में छह महीना पानी मिला उसके बाद यह भी बंद हो गया। सड़क चौड़ीकरण के दौरान वाटर कनेक्शन सभी क्षतिग्रस्त भी हो गए। वाटर कनेक्शन का पाइप और योजना दोनों सड़क के नीचे दफन हो गया है। सेन्हा में डेढ़ करोड़ हो गया बर्बाद, 4 साल से बंद है सप्लाई सेन्हा प्रखंड में एक जलमीनार है। जो लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से 2010 में बना था। इससे 350 घरों को कनेक्शन मिला है। शुरुआत में रुक रुक कर लोगों को जलापूर्ति हुआ। परंतु पिछले चार सालों से इससे सप्लाई पूरी तरह बंद है। जिसका कारण उपभोक्ताओं द्वारा मासिक शुल्क जमा नहीं करना, मशीन का खराब हो जाना और सड़क निर्माण और नाली निर्माण के दौरान जेसीबी द्वारा जगह जगह पाइप को खराब कर देना बताया जाता है। मामले पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अनूप हांसदा ने कहा कि पूर्व में बने जलमीनार के मेंटेनेंस का कार्य स्थानीय जल समितियां को दिया गया था। जिनके द्वारा मेंटेनेंस के लिए समय से रिकवरी का कार्य नहीं किया गया। जिसके कारण धीरे-धीरे यह बेकार होता चला गया। हालांकि जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया है। जल्द ही ऐसे बेकार पड़े जलमीनारों को शुरू करने का कार्य किया जाएगा।

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