घरेलू हिंसा से प्रताड़ित ऐसी महिलाएं जिन्हें घर वालों ने अचानक निकाल दिया है, उनके साथ मारपीट की गई है या उनके साथ किसी ने गलत किया है, ऐसी पीड़िताओं के लिए अब रांची में 24 घंटे मदद उपलब्ध है। रांची में यह पहला सेंटर है, जहां महिलाओं को ऐसी सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्येक मामला आने के बाद उसे बाकायदा रिकार्ड भी किया जा रहा है। जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से ऐसी पीड़िताओं के लिए सखी-आश्रय वन स्टॉप सेंटर में 24/7 मदद दी जा रही है। उन्हें सिर्फ सहायता के लिए टॉल फ्री नंबर 181 पर फोन करना है। कांके रोड स्थित रिनपास कैंपस में आश्रय वन स्टॉप सेंटर संचालित किया जा रहा है। सेंटर की खासियत यह है कि ऐसी पीड़ित महिलाओं को रहने के लिए आवास, खाने की सुविधा, अगर बीमार है तो दवा से लेकर लीगल काउंसलिंग सहित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिए सेंटर में पांच बेड भी उपलब्ध कराए गए हैं। जिसमें पीड़िताएं पांच दिन तक और कोई गंभीर मामला है तो 10 दिनों तक रह कर मदद ले सकती हैं। ये सुविधाएं उपलब्ध दो मामलों से समझें… कैसे की जा रही पीड़ित महिलाओं की मदद केस-1 : प्रसूता को बच्चे के साथ रखा
कमला (नाम बदला हुआ) को हाल ही में बच्चा हुआ है। ससुराल वालों ने बच्चे के साथ निकाल दिया। घरेलू हिंसा की पीड़ित कमला भी अपने बच्चे के साथ वन स्टॉप सेंटर में है। उसे सभी तरह की सुविधाएं सेंटर की ओर से उपलब्ध कराया जा रहे है। ताकि उसका घर फिर से बस सके। उसके बच्चे की भी देखभाल की जा रही है। केस-2 : बालिका गृह से 2 बच्चियां आईं
पलामू के एक बालिका गृह में यौन शोषण कांड हुआ था। उसकी भी दो बच्चियां सखी वन स्टॉप सेंटर में आई हुई हैं। जिन्हें कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आश्रय, संरक्षण और सहयोग के लिए तीन शिफ्ट में चल रहा 24 घंटे काम वन स्टॉप सेंटर में हर महीने 25 से 30 मामले काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें घरेलू हिंसा के मामले सबसे अधिक आ रहे हैं। इसके बाद यौन शोषण, दहेज उत्पीड़न, साइबर क्राइम, जिसमें महिलाओं के अश्लील फोटो बना वायरल करने का मामला रहता है, के मामले आ रहे हैं। महिलाओं को आश्रय, संरक्षण व सहयोग के लिए तीन शिफ्ट में सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। पहला शिफ्ट सुबह 6 बजे से दो बजे तक, दूसरा शिफ्ट दिन के दो से रात 10 बजे तक और तीसरा शिफ्ट रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक संचालित हो रहा है। तीनों शिफ्ट में पीड़िताओं की मदद के लिए महिला कर्मचारी ही उपलब्ध रहती हैं।


