सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी सीजन 2024 में प्रदेश का 39.65 लाख हेक्टेयर एरिया बीमित हुआ है। हालांकि इस बार बीमा लेने वाले किसानों की संख्या और बीमित क्षेत्र में कुछ कमी आई है।
बीमा योजना फिलहाल प्रदेश के 33 जिलों के सिस्टम के अनुसार संचालित हो रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक इन जिलों में इस बार 22 लाख 95 हजार 435 किसानों ने फसल बीमा लिया है। जबकि गत वर्ष बीमित एरिया भी इस बार से ज्यादा था। उस वक्त 40.78 लाख हेक्टेयर में गेहूं, जीरा, सरसों सहित बागवानी फसलें बीमित थीं। 31 दिसंबर बीमा करवाने की आखिरी तिथि थी। बीमा लेने वाले 22 लाख 95 हजार में से 14 लाख 35 हजार से ज्यादा ऋणी किसान और 9 लाख 83 हजार से ज्यादा किसान अऋणी है। अऋणी किसानों की संख्या गत वर्ष से चार हजार बढ़ी है। करीब 86.53 प्रतिशत किसान पुरुष हैं। जबकि महिलाओं की संख्या काफी कम महज 13.36 प्रतिशत है। 0.11 प्रतिशत अन्य श्रेणी के किसानों ने अपनी फसलों का सुरक्षा कवर लिया है। इनमें सर्वाधिक 64.58 प्रतिशत किसान अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। इसके बाद सामान्य श्रेणी के 20. 21 प्रतिशत, एसटी के 8. 15 और एससी के 7.06 प्रतिशत किसान बीमित हैं। 8 जिलों में एक लाख से ज्यादा किसान, सर्वाधिक चूरू के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सबसे ज्यादा जोखिम कवर करवाने वाले किसान चूरू जिले के हैं। यहां 1 72037 किसानों ने बीमा कराया है। एक लाख से ज्यादा संख्या वाले जिलों में सीकर, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनूं, चित्तौड़गढ़ शामिल हैं। सीकर में 110101, भीलवाड़ा में 112428, हनुमानगढ़ में 135537, जयपुर में 118283, झालवाड़ में 104771 व झुंझुनूं में 114660 किसानों ने रबी फसलों का बीमा लिया है। बीकानेर-जैसलमेर में 20 % से ज्यादा के खेत बीमित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़ों को देखें तो प्रदेश के बीमित किसानों में 86.53 प्रतिशत किसान पुरुष हैं। जबकि महिलाएं 13.36 प्रतिशत हैं। सबसे ज्यादा महिलाओं के खेत बीकानेर और जैसलमेर जिले में बीमित हैं। बीकानेर में यह आंकड़ा 22.16 प्रतिशत व जैसलमेर में 20.94 प्रतिशत है। जबकि श्रीगंगानगर में भी 19.34 प्रतिशत महिला किसानों ने बीमा लिया है। चूरू और हनुमानगढ़ में 16.48 प्रतिशत के बाद सर्वाधिक संख्या अजमेर में 15.57 प्रतिशत है। जबकि भरतपुर, जालोर, उदयपुर, सवाई माधोपुर, बांसवाड़ा, अलवर, डूंगरपुर, धौलपुर, दौसा, करौली और राजसमंद में 10 प्रतिशत से भी कम संख्या है। पूरे प्रदेश में सबसे कम 6.4 प्रतिशत डूंगरपुर में है।


