स्त्री सत्संग सभा और हजूरी रागी भाई नौनिहाल सिंह के जत्थे ने भी गुरबाणी कीर्तन किया

भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर पदमपुर रोड स्थित गुरुद्वारा धन-धन भाई मंझ जी में रविवार को वार्षिक समागम के समापन पर श्रद्धा और सेवा भावना का संगम दिखा। समागम में श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी। ​ श्रद्धा का आलम यह था कि अलसुबह कड़ाके की ठंड में भारी भीड़ के बावजूद संगत ने बेहद धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया। संगत ने लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया। पूरा परिसर वाहेगुरु के सिमरन से गुंजायमान रहा। ​कार्यक्रम की शुरुआत सुबह श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। इसके बाद विशेष कीर्तन दरबार सजाया गया। लुधियाना से पहुंचीं बीबी सिमरन कौर ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में तेरेयां भगतां तो बलिहारा धन भाई मंझ जी… और मित्तर प्यारे नूं हाल मुरीदां दा कहणां… जैसे शब्दों के जरिए संगत को निहाल कर दिया। ​गुरुद्वारा साहिब के हेड ग्रंथी भाई जतिंदर सिंह ने बताया कि समागम केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी समर्पित रहा। रूधिरा ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित शिविर में 22 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। वहीं, तेरा आसरा चैरिटेबल पैथोलॉजी लेबोरेट्री की ओर से करीब 90+ लोगों के शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य रक्त जांचें निशुल्क की गईं। इस समागम में स्त्री सत्संग सभा और हजूरी रागी भाई नौनिहाल सिंह के जत्थे ने भी गुरबाणी कीर्तन द्वारा नाम सिमरन की अविरल धारा प्रवाहित की। ​ समागम की सफलता में सेवादारों का विशेष योगदान रहा। मानस की जात सबै एकै पहचानबो के संदेश को चरितार्थ करते हुए सेवादारों ने विभिन्न व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। { ​लंगर सेवा: बड़ी संख्या में युवाओं और बुजुर्गों ने लंगर तैयार करने से लेकर संगत को पंगत में बैठाकर प्रेमपूर्वक लंगर कराने तक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। { ​जोड़ा घर (जूता घर): कई सेवादार घंटों तक संगत के जूतों की संभाल और सफाई की सेवा में जुटे रहे, जो विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का अनूठा उदाहरण था। { ​अनुशासन: पार्किंग से लेकर पांडाल की व्यवस्था तक हर जगह सेवादारों की सक्रियता ने समागम को सुव्यवस्थित बनाया।

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