भोपाल में जुटे देशभर के न्यायाधीश:अदालतें अब सरकारों को कहेंगी- केस में पहले आपसी समझौते के विकल्प तलाशें

भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) में आयो​जित नेशनल कॉन्फ्रेंस में सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बेवजह मुकदमे दायर करने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों की सबसे बड़ी वजह सरकारी केस हैं। सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के बीच इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि सरकारों को वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। सरकार की ओर से केस दायर किए जाने पर अब जज ही उन्हें यह कहें कि पहले आपसी समझौते से समाधान के विकल्प तलाशें, उसके बाद ही अदालत का रुख करें। इसके साथ ही सरकारी पक्ष को यह भी कहा जाएगा कि वर्षों तक अदालतों में केस लड़ने से होने वाले नुकसान के बजाय सरकारें मामूली नुकसान स्वीकार कर तुरंत समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। क्रिमिनल मामलों में लंबित केसों का बोझ कम करने के लिए यह रणनीति भी तय की गई कि 7 साल तक की सजा वाले मामलों को सुनवाई में प्राथमिकता दी जाएगी। गौरतलब है कि एकीकृत-प्रभावी और जनकेंद्रीत न्यायपालिका पर आधारित कॉन्फ्रेंस ​का समापन रविवार को हुआ। पहली बार… न्यायपालिका की सबसे ताकतवर तस्वीर सबसे अगली पंक्ति में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और एनजेए के डायरेक्टर जस्टिस अनिरुद्ध बोस। साथ में सुप्रीम कोर्ट के 8 वरिष्ठ न्यायाधीशगण। दूसरी व तीसरी पंक्ति में देश की 25 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस। इनमें मप्र के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, तीसरी पंक्ति में दाएं से दूसरे नंबर पर। राष्ट्रीय न्यायिक नीति पर सहमति, लेकिन मीडिया ट्रायल पर सख्त रुख मप्र हाई कोर्ट में 65% से अधिक केस सिर्फ सरकार से जुड़े हुए हैं

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *