भास्कर न्यूज | जशपुरनगर शहर के ऐतिहासिक श्रीहरि कीर्तन भवन में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। अवसर भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव का था, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ मनाया। जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की और हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा। चौथे दिन की कथा के मुख्य जजमान राजकुमार अग्रवाल और प्रभा अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत व्यासपीठ के पूजन-अर्चन और आरती के साथ हुई। बड़ी संख्या में नगरवासी और श्रद्धालु इस भक्ति अनुष्ठान में शामिल हुए। वृंदावन से पधारे कथावाचक करुणा शंकर महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब भक्तों के उद्धार और धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लेते हैं। महाराज ने भगवान के कारागार में जन्म और वासुदेव द्वारा बालकृष्ण को गोकुल पहुंचाने की कथा को संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया। भक्ति संगीत पर थिरके श्रद्धालु: कथा के दौरान गाए गए भजनों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर पंडाल में ही नृत्य करने लगे। महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया। कथा के विश्राम के बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। आयोजन समिति ने व्यवस्था संभाली और नगरवासियों से आगामी दिनों में भी प्रतिदिन शाम 6 से 9 बजे तक कथा श्रवण करने की अपील की। आकर्षण का केंद्र बनी सजीव और भव्य झांकी कथा स्थल पर कृष्ण जन्म की विशेष झांकी सजाई गई, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कारागार का दृश्य, वासुदेव-देवकी की जंजीरों का टूटना, टोकरी में बालकृष्ण को यमुना पार कराते वासुदेव की प्रस्तुति और नंद उत्सव की झलक दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। भगवान के प्रकट होते ही श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल और पुष्पों की वर्षा की।


