वोट बैंक की राजनीति में कांग्रेस इस बार महिला कार्यकर्ताओं के दम पर बाजी पलटने की तैयारी में है। सेवादल से लेकर एनएसयूआई तक की महिला विंग को सक्रिय कर पार्टी हर बूथ पर एक नया शक्ति केंद्र (महिला मंडल) बनाने जा रही है। पार्टी का मानना है कि इससे महिला मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पकड़ और मजबूत होगी। इसके लिए कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर एक मेगा प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नगर निगम के 85 वार्डों के कुल 1636 बूथों पर महिला बूथ प्रभारियों की नियुक्ति की जाएगी। कांग्रेस अपनी इस रणनीति में किसी नए प्रयोग के बजाय अनुभवी और सक्रिय चेहरों पर दांव लगा रही है। पार्टी की योजना के मुताबिक महिला कांग्रेस की पुरानी और सक्रिय नेताओं को कमान सौंपी जाएगी। एनएसयूआई, सेवादल और यूथ कांग्रेस से जुड़ी महिला नेत्रियों को उनके ही वार्ड में बूथ प्रभारी बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। हर बूथ पर बनेगा ‘महिला मंडल’ पार्टी सिर्फ प्रभारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। योजना के अनुसार, प्रत्येक बूथ पर एक ‘महिला मंडल’ का गठन किया जाएगा। ये महिला मंडल घर-घर जाकर जनसंपर्क करेंगे, मतदाताओं से सीधा संवाद करेंगे और चुनाव के दौरान होने वाली सभी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। 33% महिला आरक्षण का दिख रहा असर पार्टी सूत्रों की मानें तो इस पूरी कवायद के पीछे आगामी चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रभाव एक बड़ी वजह है। कांग्रेस को उम्मीद है कि महिला नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी से चुनावी समीकरणों पर सकारात्मक असर पड़ेगा और यह कदम गेमचेंजर साबित हो सकता है।


