सतना के धारकुंडी आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज को सोमवार दोपहर 3 बजे समाधिलीन किया गया। आश्रम परिसर में निर्माणाधीन नए मंदिर के हॉल में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें सिंहासन पर विराजित कर समाधि दी गई। यह प्रक्रिया पूरे धार्मिक वातावरण और श्रद्धा के भाव के साथ संपन्न हुई। समाधि कार्यक्रम में वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार सभी अनुष्ठान पूर्ण किए गए। सुबह से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं और अनुयायियों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। स्वामी सच्चिदानंद महाराज की पार्थिव देह को ध्यान मुद्रा में विराजित कर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर अपने गुरुदेव के दर्शन किए और श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को सीएम और डिप्टी सीएम अंतिम दर्शन करने पहुंचे
परमहंस सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर के बाद रविवार से ही धारकुंडी आश्रम में देशभर से भक्त पहुंच रहे थे। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने देर रात तक गुरु महाराज के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। सोमवार को भी आश्रम के निचले तल पर स्वामी जी की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी गई थी। हजारों भक्तों के पहुंचने के कारण प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए आश्रम से 2 किलोमीटर पहले बैरिकेड लगाकर वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया था। गुरु के अंतिम दर्शन के लिए भक्त पैदल आश्रम तक पहुंचे। कई परिवार छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर आश्रम तक पहुंचे। दोपहर 1 बजे के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच समाधि यात्रा निकाली गई, जिसके बाद उन्हें समाधिलीन किया गया।


