जिले की पहचान को मिलेगी नई उड़ान:पांच करोड़ रुपए के विकास कार्यों के प्रस्ताव भेजे, कमेटी करेगी मॉनिटिरिंग

सरकार ने सभी जिलों में ‘पंच-गौरव’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत हर जिले में एक-एक उपज, वानस्पतिक प्रजाति, उत्पाद, पर्यटन स्थल एवं खेल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके तहत जिला प्रशासन ने भरतपुर में कदंब, कुश्ती, केवलादेव घना, शहद और सरसों तेल काे शामिल किया है। क्योंकि यह सभी भरतपुर की पहचान भी हैं। सभी पांचाें सेक्टर में करीब एक-एक कराेड़ रुपए के विकास कार्य हाेंगे। इस संबंध में गत दिवस जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव बनाए गए तथा संबंधित विभागाें के अधिकारियों काे नाेडल अधिकारी नियुक्त किया है। मानीटरिंग के लिए जिला स्तर पर कमेटी बनाई गई है। सचिव राम प्रकाश ने बताया कि प्रस्तावों काे भेजा जा रहा है। सभी प्राेडेक्ट एवं साइट की प्रमाेशन फिल्म बनेगी। बुकलेट्स और ब्राेशर तैयार हाेंगे। कुल बजट करीब 6.5 कराेड़ रुपए की डिमांड की गई है। क्याें हुआ चयन और राज्य सरकार की योजना के अनुसार क्या होंगे कार्य, रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी 1. कदंब… भरतपुर ब्रज का हिस्सा है। इसे देव वृक्ष माना गया है। कदंब का फल, फूल और छाल कई औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसका उल्लेख सुश्रुत ग्रंथ में भी है। इसका फल वात, कफ, पित्त को कंट्रोल करता है।
क्या हाेगा… भूतनाथ इलाके में हाईटेक नर्सरी बनाई जाएगी। रिसर्च की सुविधा हाेगी और जल्दी ग्राेथ करने वाले पौैधे विकसित किए जाएंगे। ग्रीन हाउस और लैब बनेगी। 2. कुश्ती… रियासतकाल से जन प्रिय खेल हैं। कारे पहलवान से लेकर अब तक 300 से ज्यादा पहलवान नेशनल और स्टेट विजेता रह चुके हैं। महिला खिलाड़ियाें ने अपना अलग मुकाम बनाया है।
क्या हाेगा… कुश्ती अकादमी में इंटरनेशनल स्तर के संसाधन मैट, जिम, ट्रेनर आदि जुटाए जाएंगे। रिव्हेलर सेंटर बनाया जाएगा। ब्लाक स्तर पर कुश्ती प्रतियाेगिताओं का आयाेजन हाेगा। 3. केवलादेव घना… विश्व विरासत है। हर साल डेढ़ लाख से अधिक सैलानी आते हैं। इसी कारण 90 हाेटल एवं रेस्टोरेंट हैं। करीब 350 कराेड़ सालाना टर्नओवर है।
क्या हाेगा… आगरा, मथुरा और दिल्ली में बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन और ट्यूरिस्ट प्लेस पर हाेर्डिंग एवं साइन बाेर्ड लगाए जाएंगे। घना में सैलानियाें की सुविधा के लिए संसाधन जुटाए जाएंगे। 4. शहद… एनसीआर और टीटीजेड में हाेने के कारण यहां इकाे फ्रेंडली उद्याेगाें की ही संभावना है। करीब 5 हजार बीकीपर्स हैं और करीब 7 हजार टन शहद की प्रोसेसिंग हाेती हैं। करीब 170 कराेड़ का काराेबार है।
क्या हाेगा… मधुमक्खी पालन जागरुकता कार्य क्रम हाेंगे। किट मुहैया कराई जाएंगी तथा शहद प्राेसेस प्रोजेक्ट बनेेगा। शहद की खपत बढ़ाने के लिए मार्केटिंग की जाएगी। 5. सरसों तेल… देश की सबसे बड़ी मंडी है। तेल बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आसाम सहित कई राज्यों में जाता है। खल बांग्लादेश जाती है। करीब 110 यूनिट हैं। करीब 5 हजार कराेड़ का टर्नओवर है।
क्या हाेगा… सरसों में तेल प्रतिशत और उत्पादन बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चलेगा। अनुसंधान केंद्र के सहयाेग से नई किस्म तैयार कराई जाएंगी।

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