एसआई भर्ती 2021 पेपर लीक केस में सरकार ने गुरुवार को बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाए। सरकार के एएजी विज्ञान शाह ने कहा कि उन्होंने ना केवल अदालत से तथ्य छिपाए हैं, बल्कि याचिका दायर होने के बाद दो महीने तक तारीख ही लेते रहे। एएजी ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 13 अगस्त 2024 के बाद जो भी कार्रवाई की उसे याचिकाकर्ताओं ने अदालत को नहीं बताया और यथास्थिति का आदेश ले लिया। इन्होंने सरकार की मंशा का भी दुरुपयोग किया और मामले में मंत्रिमंडलीय कमेटी के गठन को ऐसे पेश किया जैसे इसके गठन में सरकार ने देरी की है, जबकि कमेटी ने 10 दिन में ही दो मीटिंग कर ली थी। ऐसे में सरकार के खिलाफ याचिका तब ही दायर हो सकती है जब सरकार ने कोई गलत निर्णय किया हो या निर्णय लेने की प्रक्रिया में अनियमितता हुई हो। जबकि सरकार एसओजी की रिपोर्ट आने के तत्काल बाद ही हरकत में आ गई थी। सरकार ना केवल भर्ती परीक्षा को लेकर महाधिवक्ता से विधिक राय ले ली थी, बल्कि कमेटी भी बना दी थी। इस दौरान ही भर्ती में आरपीएससी सदस्यों की भूमिका सामने आने पर सरकार का गहन विचार-विमर्श चल रहा था, लेकिन उन्होंने इस याचिका के जरिए पूरी जांच प्रक्रिया में ही दखल दे दिया। मामले में समयाभाव के चलते राज्य सरकार की बहस पूरी नहीं हो पाई। जिस पर जस्टिस समीर जैन ने मामले की सुनवाई शुक्रवार को तय की है। RPSC के पूर्व सदस्य राईका के बेटा-बेटी को जमानत नहीं हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 पेपर लीक मामले में आरोपी आरपीएससी के पूर्व सदस्य रामूराम राईका के बेटे देवेश, बेटी शोभा सहित अनिल सांखला, रितु शर्मा व अंकिता गोदारा की जमानत याचिकाएं गुरुवार को खारिज कर दीं। जस्टिस गणेशराम मीणा ने यह आदेश आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दिया।अदालत ने मामले से जुड़े अन्य 23 आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है। राईका के बेटे व बेटी की ओर से कहा कि मामले में उनकी लिप्तता नहीं है और एसओजी ने जबरन फंसाया है। जवाब में सरकार ने कहा कि मामला पेपर लीक से जुड़ा है और गंभीर है। एसओजी की जांच में सामने आया था कि राईका ने आरपीएससी में सदस्य रहते बेटे व बेटी को हाथ से लिखा पेपर दिया था। बेटी की पांचवीं व बेटे की 40वीं रैंक आई थी। एसओजी ने जब दुबारा टेस्ट लिया तो कम अंक आए।


