मंगला पशु बीमा:प्रदेश में सर्वाधिक 7.01 लाख पंजीयन भैंस के बीमे के लिए, 5.64 लाख के साथ गाय दूसरे नंबर पर, ऊंट के सबसे

प्रदेश में पशुओं के निशुल्क बीमा के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा याेजना में दो महीने बाद भी लक्ष्य की तुलना में 86.03% पशुओं का पंजीयन हो पाया है। यह स्थिति भी तब है जब सरकार ने प्रदेश में कुल पशुधन 5.50 करोड़ में से 21 लाख यानी 4% से भी कम पशुओं के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य रखा है। अब तक 18.06 लाख पशुओं का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है। जबकि पंजीयन तिथि 4 बार बढ़ाई जा चुकी है। विभागीय जानकारी के अनुसार 13 फरवरी तक 18.06 लाख यानी 86.03% ही पंजीयन हो पाया है। इसमें भी सर्वाधिक 7.01 लाख रजिस्ट्रेशन भैंस के हैं। दूसरे नंबर पर गायों के 5.64 लाख पंजीयन हुए हैं। सबसे कम 7079 पंजीयन ऊंटों के हुए हैं, जबकि इनकी संख्या 3 लाख मानी जा रही है। बकरियों के 3.91 लाख व भेड़ों के 1.42 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं। पशु पंजीयन में वागड़ के बांसवाड़ा व डूंगरपुर टॉप थ्री में और हाड़ौती के कोटा, बूंदी व बारां जिले टॉप-7 में शामिल हैं। पशुओं की संख्या सीमित रखना अव्यावहारिक शर्त योजना के प्रति पशुपालकों की अरुचि के पीछे बड़ी वजह है- पहले पंजीयन, फिर लॉटरी प्रक्रिया से बीमा। योजना में शर्त रखी गई है कि पशुपालक अधिकतम 2 गाय या 2 भैंस का ही बीमा करवा सकता है। या 10 बकरी या 10 भेड़ का बीमा करा सकता है। ऊंटपालक सिर्फ एक ऊंट का बीमा करा सकता है। 20 वीं पशुगणना के अनुसार राजस्थान में कुल 5.68 करोड़ पशुधन है, जो देश में यूपी के बाद दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में गोवंश 1.39 करोड़, भैंस 1.37 करोड़ हैं। भेड़ 79 लाख, बकरियां 2.08 करोड़ व ऊंट 21.3 लाख हैं। कामधेनु में 80 लाख हुए थे पिछली सरकार ने गाय-भैंस के बीमा के लिए कामधेनु पशु बीमा योजना शुरू की थी। तब भी 20 लाख का ही लक्ष्य रखा था जबकि पशुपालकों ने 80 लाख पशुओं का बीमा पंजीयन करवाया था। बीमा के लिए सर्वे भी शुरू हो गया था लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण काम रुक गया। बाद में नई सरकार कामधेनु पशु बीमा की जगह मंगला पशु बीमा योजना ले आई। इसके तहत 13 दिसंबर से 12 जनवरी तक पंजीयन होना था। इसके बाद तिथि 22 जनवरी,31 जनवरी व 11 फरवरी की गई। अब 21 फरवरी तक बढ़ाई गई है।

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