छत्तीसगढ़ अफसरों की कमी से जूझ रहा है। प्रदेश में आईएएस के 202 पद स्वीकृत हैं इनमें से 173 अफसर काम कर रहे हैं। यानी 29 अफसरों की कमी है। इसी कमी के कारण कई अफसरों को महत्वपूर्ण विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश में चीफ सेक्रेटरी स्तर के पांच अफसर हैं लेकिन इनमें से चार एसीएस हैं। लेकिन दो की पोस्टिंग मंत्रालय से बाहर है। कमी का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि वर्तमान में राज्य के 21 आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनमें अमित अग्रवाल और निधि छिब्बर जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। हाल ही में एस हरीश, डॉ. प्रियंका शुक्ला केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गईं हैं। इसी तरह राज्य में आईपीएस के कुल स्वीकृत पद 153 हैं जबकि कुल 129 अफसर ही पदस्थ हैं। दिसंबर में छत्तीसगढ़ को पांच नए आईपीएस मिले हैं जिनमें से दो अफसर छत्तीसगढ़ कैडर के ही हैं। इस तरह यहां अब कुल 134 आईपीएल पदस्थ हैं। यानी अब भी 19 पद खाली हैं। राज्य में आईपीएस की तरह 153 आईएफएस पदस्थ हैं। लेकिन कुल 118 अफसर पदस्थ हैं। इस तरह प्रदेश में आईएफएस के 35 पद रिक्त पड़े हैं। दरअसल राज्य कैडर के 21 आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार में नीति निर्माण, आंतरिक सुरक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल पहचान, आयुष और निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव 30 आईएएस-आईपीएस बनाए गए पर्यवेक्षक देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ के 30 आईएएस-आइपीएस अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ कैडर के सचिव स्तर के 25 आईएएस और पांच वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए अगले महीने अधिसूचना जारी होने की संभावना है। आईएएस अधिकारियों में ऋतु सेन, सिद्धार्थ कोमल परदेशी, नीलम एक्का, एस प्रकाश, भुवनेश यादव, एस. भारतीदासन, अंकित आनंद, शम्मी आबिदी, अवनीश शरण और सारांश मित्तर समेत अन्य शामिल हैं। … 5 से 7 साल तक रह सकते हैं प्रतिनियुक्ति पर अफसरों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति स्थायी ट्रांसफर नहीं होता, बल्कि तय अवधि की पोस्टिंग होती है। आम तौर पर इसकी अवधि लगभग 5 साल मानी जाती है। आवश्यकता और सरकार की मंजूरी के आधार पर इसे 7 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। वरिष्ठ पदों जैसे ज्वाइंट सेक्रेटरी, एडिशनल सेक्रेटरी या आगे चलकर सेक्रेटरी स्तर तक पहुंचने में केंद्रीय अनुभव बड़ी भूमिका निभाता है। अलग-अलग स्तर पर अवधि में थोड़ा अंतर हो सकता है। डिप्टी सेक्रेटरी या डायरेक्टर स्तर की पोस्टिंग सामान्यतः 4–5 साल के आसपास होती है। ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर पर भी लगभग 5 साल की अवधि प्रचलित है। इससे ऊपर के पदों पर तैनाती सरकार की आवश्यकता के अनुसार तय होती है। तय अवधि इसलिए रखी जाती है ताकि राज्यों से बहुत अधिक अफसर लंबे समय तक बाहर न रहें, केंद्र में भी नए अधिकारियों को मौका मिलता रहे। 21 आईएएस केंद्र में कई अहम पदों पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले अफसरों में गौरव द्विवेदी, मनिंदर कौर द्विवेदी, अमित अग्रवाल, हरीश एस, ऋचा प्रकाश चौधरी, नम्रत गांधी, शिव अनंत तयाल, सौरभ कुमार, तंबोली अय्याज फकीरभाई, डा. प्रियंका शुक्ला, नीरज कुमार बंसोड़, केसी देव सेनापति, एलेक्स पॉल मेनन, श्रुति सिंह, अलरमेल मंगई डी, पी अंबलगन, प्रसन्ना आर, संगीता पी और ऋतु सैन शामिल हैं।


