प्रदेश में पेयजल सप्लाई के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) का काम अब बड़ी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है, ताकि चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता स्तर पर मॉनिटरिंग संभव हो सके। पूरे जिले की जिम्मेदारी एक ही कंपनी को देने से कॉल सेंटर और शिकायत निस्तारण की व्यवस्था सेंट्रलाइज्ड होगी। अब तक पंप हाउस और टंकियों के अनुसार अलग-अलग ठेकेदारों और कंपनियों को काम दिया जाता था, जिससे एईएन और एक्सईएन स्तर पर निगरानी होती थी। नई व्यवस्था में एक जिले की पूरी पेयजल सप्लाई एक ही कंपनी के जिम्मे होगी। इसके लिए विभाग लगातार बैठकें कर पॉलिसी को अंतिम रूप दे रहा है। नई पॉलिसी में अदाणी वाटर लिमिटेड, एलएंडटी प्रा. लि. और जीवीपीआर जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। विभाग का फोकस गर्मियों में शिकायतों का समय पर समाधान है। हर घर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। नए सिस्टम से यह होगा फायदा विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था पेयजल सप्लाई को केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक सेवा के रूप में मजबूत करेगी। सप्लाई की निरंतरता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता तय होगी। एक ही एजेंसी को पूरी जिम्मेदारी मिलने से जवाबदेही तय होगी और लापरवाही की गुंजाइश कम होगी। पॉलिसी में परफॉर्मेंस आधारित भुगतान और दंड का प्रावधान रहेगा, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर और मानक गुणवत्ता का पानी मिल सकेगा। ओएंडएम पॉलिसी पर जिला स्तर पर मंथन
सोमवार को ओएंडएम पॉलिसी को लेकर प्री-टेंडर स्टेकहोल्डर कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें चीफ इंजीनियर मनीष बेनीवाल, केडी गुप्ता, नीरज माथुर, राज सिंह चौधरी, आरके मीणा, देवराज सोलंकी सहित अन्य इंजीनियर मौजूद रहे। कॉन्फ्रेंस में अदाणी वाटर लि., एलएंडटी प्रा. लि., जीवीपीआर सहित राज्यभर के बड़े और छोटे स्टेकहोल्डर्स, फर्म्स, कंसल्टेंट्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हुए। प्रस्तावित ओएंडएम पॉलिसी फ्रेमवर्क पर सुझाव और अनुभव साझा किए गए। छोटे ठेकेदारों का विरोध नई व्यवस्था के प्रस्ताव के साथ ही छोटी स्कीमों का ओएंडएम ठेका संभालने वाले ठेकेदारों का एक गुट विरोध में उतर आया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से बड़ी कंपनियों को ही काम मिलेगा, जिससे छोटे ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे।


