राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पीबीआई (परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव) में जनवरी 2026 से लागू किए गए बदलाव व लक्ष्यों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) ने ऐतराज जताया है। अधिकारियों ने मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजकर नए लक्ष्यों को व्यवहारिक नहीं बताते हुए उनमें संशोधन की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि पहले एनसीडी स्क्रीनिंग का लक्ष्य 5000 की जनसंख्या पर 150 था, जिसे यथासंभव पूरा किया जा रहा था। जनवरी 2026 से इसे कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत प्रतिमाह कर दिया गया है, जो जमीनी स्तर पर असंभव है। इसी तरह टीबी कार्यक्रम में पहले 5000 की जनसंख्या पर 15 स्पुटम कलेक्शन का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत (लगभग 60 स्युटम कलेक्शन प्रतिमाह) कर दिया है। सर्वे एनीमिया में कुल गर्भवती महिलाओं का 1 प्रतिशत प्रतिमाह, पीएचआई में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का 3 प्रतिशत प्रतिमाह लक्ष्य भी अव्यावहारिक बताया है। आयरन सोर्स इंजेक्शन के लिए कुल पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का 70 प्रतिशत लक्ष्य तय किया है, वास्तविकता यह है कि 50 प्रतिशत से भी कम महिलाएं मॉडरेट एनीमिया की श्रेणी में आती हैं। सीएचओ ने ज्ञापन में बताया कि नया पीबीआई इस तरह बनाया है कि यदि किसी महीने 50 प्रतिशत लक्ष्य भी पूरा हो जाता है, तब भी प्रोत्साहन राशि शून्य रहती है। इससे फील्ड स्टाफ का मनोबल गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्वरूप में इसे भर पाना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जब तक इंडिकेटर और प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन नहीं किया जाता, तब तक पुराने इंडिकेटर को ही लागू किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि यदि जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप सुधार किए जाते हैं, तो वे सकारात्मक उत्साह के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकेंगे। टीकाकरण को एक इंडिकेटर के रूप में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए यू विन पोर्टल को डेटा स्रोत बताया गया है, लेकिन फिलहाल पोर्टल पर एमआर-1 और एमआर-2 दोनों टीके प्राप्त करने वाले बच्चों का समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है।


