जीवाजी यूनिवर्सिटी से संबद्ध 121 सामान्य कॉलेजों में से 30 ने सत्र 2025-26 में शर्तों के साथ जो संबद्धता ली थी, उनकी कमियों को पूरा करने के लिए अब तक शपथ पत्र नहीं दिया है। जेयू प्रशासन ने 30 सितंबर तक कमियों को पूरा करने के लिए शपथ पत्र नहीं देने पर ऐसे कॉलेजों की संबद्धता खत्म करने की बात कही थी। इसके बाद ऐसे कॉलेजों को अक्टूबर, फिर नवंबर ही नहीं दिसंबर 2025 तक 4 बार मौका दिया गया। नोटिस पर नोटिस मिलने के बाद भी न शिक्षकों की नियुक्तियां की। न ही लैब अपडेट की। इतना ही नहीं खेल मैदान भी विकसित नहीं किया। बड़ा फर्जीवाड़ा शिक्षकों को बैंक की बजाय नगद वेतन भुगतान करना है। नगद वेतन देने का मतलब यह है कि ऐसे कॉलेज निरीक्षण के समय ऐसे डमी शिक्षकों को खड़ा कर देते हैं लेकिन हकीकत में ऐसे शिक्षक कॉलेज में पूरे साल नहीं दिखते न पढ़ाने आते न अन्य काम में दिखते। इसके बाद भी जेयू से संबद्धता पाने का खेल जारी है। इतना ही नहीं ऐसे कॉलेजों की ढिठाई देखिए। फिरसे कमियों के साथ सत्र 2026-27 की संबद्धता लेने को तैयार हैं। इन कॉलेजों ने कमियां पूरी नहीं की फिर भी संबद्धता की जिद 3 उदाहरण से समझे, कैसे मानकों को पूरा किए बिना संबद्धता ले रहे कॉलेज 1-शिक्षकों को बैंक से भुगतान: जेयू से संबद्ध उमा डिग्री कॉलेज बड़ोखर, अंबाह रोड, मुरैना ने शिक्षकों की भर्ती नहीं की। खेल का मैदान विकसित नहीं किया। जो शिक्षक निरीक्षण कमेटी को सत्र 2025-26 में नियुक्त होना बताया गया, उन्हें वेतन का भुगतान नगद देना बताया गया। जबकि यह नियमों का खुला उल्लंघन है। 2 लैब अपडेट नहीं मिली: कॉलेज ऑफ एडवांस स्टडीज हाउसिंग बोर्ड दतिया में सामान्य कोर्स संचालित होते हैं। इस कॉलेज में सत्र 2025-26 में निरीक्षण कमेटी ने लिखा था कि लैब अपडेट करें। साथ ही लाइब्रेरी को बेहतर किया जाए। शिक्षकों को वेतन बैंक के माध्यम से दिया जाए। 3-कॉलेज का भवन नहीं फिर भी मिल गई संबद्धता: निरीक्षण कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा था कि स्वामी समर्थ कॉलेज, ग्वालियर के पास स्वयं का भवन नहीं है। आगामी वर्ष में स्वयं के भवन में महाविद्यालय को संचालित करने की अनुशंसा की है। साथ ही कॉलेज में पुस्तकों की कमी मिली। शिक्षकों को नगद वेतन भुगतान करना बताया जो कि फर्जीवाड़े में आता है। दरअसल, कॉलेजों को स्टाफ को बैंक के माध्यम से वेतन का भुगतान करना चाहिए। नोट: कॉलेजों के नाम जेयू प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार है जिम्मेदारी स्थायी समिति और ईसी की लेकिन नहीं करते कार्रवाई संबद्धता घोटाले में असली दोषी स्थायी समिति व कार्यपरिषद सदस्य हैं जो बैठक में जाते हैं। लेकिन कमियों वाले कॉलेजों के खिलाफ एक लफ्ज भी नहीं बोलते। स्थायी समिति व कार्यपरिषद के अध्यक्ष कुलगुरु होते हैं। कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने भी ऐसे कॉलेजों पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। सामान्य कोर्स के लिए संबद्धता शुल्क 20 तक जमा कर सकेंगे जेयू ने सत्र 2026-27 के लिए सामान्य पाठ्यक्रमों की संबद्धता के लिए 20 फरवरी तक शुल्क जमा करना होगा। हार्ड कॉपी 25 फरवरी तक जमा करनी होगी। विलंब की स्थिति में 25% अतिरिक्त शुल्क के साथ अंतिम तिथि 25 फरवरी तय की है। कमियां पूरा न करने वाले कॉलेजों पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है सत्र 2025-26 में जिन निजी कॉलेजों को शर्तों के साथ संबद्धता दी गई थी। उन्हें कमियां पूरा करने के लिए 4 बार नोटिस दिए। इसके बाद भी शपथ पत्र नहीं जमा किया। ऐसे कॉलेजों की संख्या 30 है। अब ऐसे कॉलेजों पर 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। सत्र 2026-27 में ऐसे कॉलेजों को तभी संबद्धता दी जाएगी जब वह कमियां पूरा करेंगे।
-डॉ. राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू


