केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह खोर का मंगलवार सुबह अचानक निधन हो गया। फिलहाल उनको कार्डियक अरेस्ट होने की बात सामने आ रही है। मंगलवार सुबह जब वे देर तक नहीं उठे तो परिजनों ने उन्हें जगाने की कोशिश की, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं दिखी। इसके बाद उन्हें तुरंत सुबह करीब 8 बजे जिला हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। जिला हॉस्पिटल में पहुंचे विधायक और समाज जने लक्ष्मण सिंह खोर के निधन की सूचना मिलते ही जिला हॉस्पिटल में लोगों का जमावड़ा लग गया। चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या भी हॉस्पिटल पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। इसके अलावा चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के पूर्व प्रधान प्रवीण सिंह, बस्सी मंडल अध्यक्ष भंवर सिंह खरड़ीबावड़ी, जौहर स्मृति संस्थान के पदाधिकारी और राजपूत समाज के कई लोग भी हॉस्पिटल पहुंचे। उनके शव को जिला हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया गया है। बताया गया है कि उनके बड़े बेटे के रांची से आने के बाद ही आगे की अंतिम प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अगले महीने था उनका जन्मदिन लक्ष्मण सिंह खोर, खोर गांव के निवासी थे। वे सावंत सिंह शक्तावत के पुत्र थे। उनका जन्म 12 मार्च 1959 को हुआ था और वे अगले महीने 67 वर्ष के होने वाले थे। परिवार और समाज में उनकी पहचान एक सरल, मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में थी। वे खुद भी एक किसान थे। उनके असामयिक निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचा है। गांव और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल बना हुआ है। वार्ड पंच से राजनीतिक सफर की शुरुआत की लक्ष्मण सिंह खोर का राजनीतिक जीवन जमीनी स्तर से शुरू हुआ था। पहले खोर की ग्राम पंचायत घटियावली में आती थी। इसी दौरान वे वहां से वार्ड पंच बने। वार्ड पंच के रूप में काम करते हुए उन्होंने स्थानीय समस्याओं को नजदीक से समझा और लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद वे भाजपा की ओर से उसी ग्राम पंचायत से उपसरपंच चुने गए। इस दौरान उन्होंने संगठन और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। चुनावी अनुभव और सहकारिता क्षेत्र में उनकी भूमिका रही खास इसके बाद लक्ष्मण सिंह खोर ने जिला परिषद का चुनाव भी लड़ा, हालांकि इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार से निराश हुए बिना सहकारिता क्षेत्र में काम करना जारी रखा। वे घटियावली ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष बने। इसके बाद वे लगातार केंद्रीय सहकारी बैंक (CKSB) के डायरेक्टर चुने जाते रहे। सहकारिता क्षेत्र में उनकी पकड़ और अनुभव लगातार मजबूत होता गया। साल 2015 से लगातार केंद्रीय सहकारी बैंक के चेयरमैन लक्ष्मण सिंह खोर को केंद्रीय सहकारी बैंक में दो बार वाइस चेयरमैन चुना गया। साल 2015 में उन्हें बैंक का चेयरमैन बनाया गया। तब से लेकर अब तक वे इसी पद पर बने रहे। उनके कार्यकाल में बैंक से जुड़े कई फैसले लिए गए और सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई। वे विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के काफी करीबी माने जाते थे और राजनीतिक तथा सहकारिता दोनों क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ थी।


