10 मंजिला सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में 15 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से लगाई गईं लिफ्ट मरीजों व उनके परिजन को काम नहीं आ पा रही हैं। अस्पताल में लगी कुल 12 लिफ्ट में से 8 लिफ्ट मेंटेनेंस का ठेका खत्म होने के बाद नई व्यवस्था नहीं होने से बंद पड़ी हुई हैं। अस्पताल में रोज 150 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। डॉक्टर, स्टाफ, परिजन भी इन्हीं लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। यानी हर दिन 500 से ज्यादा लोग लिफ्ट पर निर्भर हैं। लिफ्ट बंद होने से बुजुर्ग, गंभीर और कमजोर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठाना पड़ रही है। कई मरीजों को सीढ़ियों और रैम्प का सहारा लेना पड़ रहा है, जबकि अस्पताल में मरीजों को अभी छठी मंजिल तक भर्ती किया जाता है। प्रभारी अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने बताया पीडब्ल्यूडी से पत्राचार जारी है और लिफ्ट संचालन जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। 2021 में लगी थीं, ठेका अक्टूबर 2025 में खत्म
अस्पताल में सभी लिफ्ट वर्ष 2021 में एक मल्टीनेशनल इलेक्ट्रिकल कंपनी द्वारा ही इंस्टॉल की गई थीं, जिस पर 15 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए थे। इंस्टॉलेशन के साथ दो साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी कंपनी की थी। इसके बाद वर्ष 2023 में पीडब्ल्यूडी ने एक निजी फर्म को मेंटेनेंस का ठेका दिया। शर्त यह थी कि लिफ्ट का मेंटेनेंस कंपनी या उसके अधिकृत डीलर से ही कराया जाएगा, क्योंकि सॉफ्टवेयर से जुड़ा तकनीकी नियंत्रण कंपनी के पास ही था। यह ठेका 9 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गया। गलत तकनीकी शर्तों से जनवरी का टेंडर खुलने से पहले ही निरस्त
ठेका खत्म होने से पहले ही अस्पताल प्रबंधन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज को सूचना दी थी, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी को नया टेंडर निकालने के लिए पत्र भेजा गया। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल विभाग ने जनवरी 2026 में जो टेंडर निकाला, उसमें सामान्य इलेक्ट्रिकल फर्मों को शामिल कर लिया गया। तकनीकी खामी सामने आने पर कॉलेज प्रबंधन ने आपत्ति जताई, जिसके बाद 10 फरवरी को टेंडर खुलने से पहले ही निरस्त कर दिया गया। पहले ढूंढा अस्थायी समाधान
एक माह पहले मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने लिफ्ट लगाने वाली कंपनी से सहयोग लेकर कुछ लिफ्ट अस्थायी रूप से चालू कराई थीं, लेकिन नियमित मेंटेनेंस ठेका नहीं होने के कारण कंपनी ने दोबारा सहायता से इनकार कर दिया। इसके चलते लिफ्ट फिर से बंद हो गई हैं। इस बीच कर्मचारी लिफ्ट के सॉफ्टवेयर को रिसेट कर जैसे-तैसे काम चलाते रहे। अब फिर टेंडर, दो माह लगेंगे
टेंडर निरस्त होने के बाद पीडब्ल्यूडी को पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करना होगी, जिसमें एक से दो माह लग सकते हैं। ऐसे में अक्टूबर से मार्च के बीच छह माह तक मरीजों को परेशानी झेलना पड़ सकती है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा रही है और तकनीकी शर्तों में सुधार के बाद जल्द निर्णय लिया जाएगा।


