मोरेल बांध का जल निकासी द्वार फंसा, 6700 हैक्टेयर पर खड़ी फसल सूखने के कगार पर

मोरेल बांध की पूर्वी नहर का जल निकासी द्वार 31 जनवरी रात्रि से फंसा होने के कारण बंद पड़ा है। गेट फंसने से बरनाला और लालसोट तहसील के करीब 28 गांवों में निवासरत 80 से ज्यादा किसानों की लगभग 6700 हैक्टेयर भूमि पर खड़ी गेहूं सहित अन्य फसल सूखने का गंभीर संकट मंडराया गया है। इधर, सिंचाई विभाग लालसोट खंड के एईएन चेतराम मीणा ने बताया कि गेट की मरम्मत कराने पर लगभग दो से तीन लाख रुपए का खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति एक्सईएन स्तर से होनी है। किसान राजपति मीणा, शिवचरण मीणा, सचिन घुणावत, रामकेश मीणा और हरकेश मीणा ने सिंचाई विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण शीघ्र पानी नहीं छोड़ा गया तो तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। मोरेल बांध समिति अध्यक्ष कांजी मीणा (बरनाला) ने बताया कि इस संबंध में सिंचाई विभाग के जेईएन, एईएन और एक्सईएन को अवगत करा दिया गया है। अगर एक-दो दिन में नहर चालू नहीं होती है तो किसान विभागीय कार्यालय की तरफ कूच करेंगे। किसान सभा जिला अध्यक्ष कांजी मीणा (जस्टाना) ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। आज गेट ठीक कर देंगे ^गेट की मरम्मत करने वाली टीम से संपर्क किया गया है। टीम के गुरुवार को पहुंचने की सूचना है। गेट को शीघ्र दुरुस्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। -मांगीलाल, एक्सईएन दौसा

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