नौलखा गेट पर दिखी बाघिन टी-2504, गणेश दर्शन मार्ग पर रोका रास्ता, कुछ देर बाद जंगल में लौट गई

कासं|सवाईमाधोपुर| रणथंभौर दुर्ग में बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब त्रिनेत्र गणेश मंदिर के मार्ग पर नौलखा गेट के पास युवा बाघिन टी-2504 दिखाई दी। दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में अचानक बाघ के नजर आते ही अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर गेट बंद कराया और एहतियातन आवाजाही रोक दी। कुछ देर बाद बाघिन जंगल की ओर लौट गई, तब जाकर स्थिति सामान्य हो सकी। रणथंभौर दुर्ग में एक बार फिर बाघ की दस्तक से त्रिनेत्र गणेश मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया। रणथंभौर के उपवन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि बाघिन रिद्धि (टी-124) की युवा बेटी टी-2504 का दुर्ग क्षेत्र में मूवमेंट रहा। टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर हटाया। बाघिन के लिए रास्ता खाली कराया गया, कुछ देर चहल कदमी करने के बाद वह सुरक्षित जंगल की ओर चली गई। पहले भी दुर्ग क्षेत्र में दिख चुके बाघ 5 जनवरी 2026: रणथंभौर फोर्ट की पार्किंग के पास बाघिन रिद्धि के नर शावक का मूवमेंट रहा। दोपहर करीब 2 बजे शावक दीवार और गणेश मार्ग पर लगभग 10 मिनट तक टहलता नजर आया। पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने इसका वीडियो भी बनाया। बाद में शावक जोन नंबर-3 की ओर चला गया। 18 दिसम्बर 2025 : बाघिन रिद्धि टी-124 अपने दो शावकों के साथ रणथंभौर दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंच गई थी। करीब 15-20 मिनट तक वह जोगी महल की दीवार पर बैठी रही। इस दौरान त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को रोकना पड़ा। वनकर्मियों ने तुरंत पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर हटाया। 19 नवम्बर 2025 : बाघिन सुल्ताना टी-107 का नर शावक मुख्य सड़क पर करीब 10 मिनट तक घूमता रहा, जिससे मंदिर मार्ग पर यातायात बाधित हो गया। दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। लोग वाहनों में बैठे-बैठे ही टाइगर का दीदार करते रहे। 9 जून 2025 : रणथंभौर दुर्ग में जैन मंदिर के 60 वर्षीय पुजारी राधेश्याम माली पर बाघिन ऐरोहेड के शावक ने हमला कर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। घटना सुबह शौच के लिए जाते समय हुई थी। लगातार बढ़ रहे टाइगर मूवमेंट से यह साफ है कि दुर्ग क्षेत्र में बाघों की सक्रियता बनी हुई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच वन विभाग के लिए सुरक्षा प्रबंधन चुनौती बना हुआ है। हालांकि हर बार त्वरित कार्रवाई से संभावित बड़े हादसे टलते नजर आए हैं।

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