डीग में शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर परिसर में स्थित पुरातन कुएं के संरक्षण और खोज से जुड़े विवाद पर अब जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस मामले में शिकायत सामने आने के बाद जिला कलेक्टर ने संज्ञान लिया है। उन्होंने देवस्थान विभाग से 24 घंटे के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, प्रशासनिक सख्ती के बावजूद देवस्थान विभाग की भूमिका अभी भी संदेह के घेरे में है। मामला सामने आने के कई दिन बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ने फोन पर बताया कि उन्हें इस पूरे प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है। विभाग के इस रवैये से मामले की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद अमरनाथ गुप्ता ने अपने शिकायत पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वर्ष 1972-73 के दौरान देवस्थान विभाग और जिला प्रशासन के पत्रों में कुएं के अस्तित्व, उसके संरक्षण और उस पर हो रहे अतिक्रमण का स्पष्ट उल्लेख था। इसके बावजूद संबंधित पत्रावलियों को सार्वजनिक नहीं किया गया और विभागीय संपत्तियों पर अवैध कब्जों को संरक्षण दिया गया। अमरनाथ गुप्ता ने करीब डेढ़ वर्ष पहले कलेक्टर को शिकायत पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने देवस्थान विभाग, भरतपुर से संपूर्ण पत्रावली मंगाकर पुरातन कुएं की खोज कराने और अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। हालांकि, डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो दस्तावेज मंगवाए गए और न ही कुएं की खोज की कोई प्रक्रिया शुरू हुई। इस निष्क्रियता पर अब सवाल उठने लगे हैं। पुरातन कुएं से जुड़ा पूरा मामला
जानकारी के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पार्षद अमरनाथ गुप्ता ने 12 जून 2024 को तत्कालीन जिला कलेक्टर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था। पत्र में बताया गया था कि लक्ष्मण मंदिर परिसर में स्थित पुरातन कुएं का उल्लेख तत्कालीन जिला कलेक्टर भरतपुर द्वारा 19 अक्टूबर 1972 को जारी अर्धशासकीय पत्र सहित देवस्थान विभाग की पत्रावलियों और नक्शों में मिलता है। उस समय के पुजारी पंडित राधाचरण पाराशर द्वारा भी कुएं पर अतिक्रमण को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि जलमहलों से लक्ष्मण मंदिर तक भूमिगत सुरंग होने की बात कही जाती है और जलमहलों की तरह ही मंदिर परिसर में फव्वारे चलते थे। इन फव्वारों का जल स्रोत यही पुरातन कुआं बताया जाता है।


