ज्ञान गंगा महोत्सव के दूसरे दिन राष्ट्र संत भारत गौरव आचार्य पुलक सागर महाराज ने परिवार का पाठ सिखाया। उन्होंने सुखमय जीवन के लिए एकजुट परिवार और संस्कारों की सीख दी। पुलक मंच परिवार की ओर से शहर के बैंकर्स स्ट्रीट में ज्ञान गंगा महोत्सव के दूसरे दिन पूजन किया। पवन कुमार जैन केशरिया परिवार की ओर से महाराज का पूजन किया गया। महाराज की आरती उतारी और महाराज संघ का आशीर्वाद लिया। राष्ट्र संत भारत गौरव आचार्य पुलक सागर महाराज ने हाथों की लकीरों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि लकीरों बहुत कुछ बताती हैं। लकीरें हाथ पर खींच जाए तो किस्मत बन जाती है। लकीरें सरहद पर खींच जाए तो सीमाएं हो जाती हैं। लकीरें शरीर पर पड़ जाए तो खून हो जाता है। लकीरें रिश्तों पर पड़ जाए तो दीवार बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि सच है कि 4 दीवार और एक छत अगर मजबूती से जुड़ जाए तो मकान हो जाता है और छत उन दीवारों को छोड़ दे तो खंडहर हो जाया करती है। महाराज ने परिवार में बिखराव को लेकर कहा कि एक मकान ने अपने मालिक से कहा कि हम खड़े हैं सदियों से तो तुम क्यों बिखर गए। एक मकान की आयु 100 साल होती है। ये सच है कि 1 मकान को बनाने मैं पैसा लगता है, लेकिन एक परिवार को जोड़ने में प्यार की जरूरत होती है। महाराज ने कहा कि आजकल लोग मंगल पर जीवन ढूंढ रहे हैं, लेकिन ठंड के इस मौसम में संत डूंगरपुर आए हैं। वो मंगल ग्रह पर जीवन नहीं ढूंढ सकते। बल्कि जीवन में मंगल लाने की बात करते हैं। इसलिए मंगल पर जीवन मत ढूंढो। जीवन में मंगल लाने का प्रयास करो। जीवन हमारा मंगल होना चाहिए। जीवन हमारा पवित्र होना चाहिए। जीवन हमारा आदर्शमय होना चाहिए। कल के प्रवचन से मेरा जीवन सार्थक
राष्ट्र संत पुलक सागर महाराज ने बच्चों में संस्कार को लेकर कहा कि कल कुछ बच्चे उनसे मिलने आएं। बच्चों ने कहा कि महाराज हमने आपका प्रवचन सुना। तो बच्चों से पूछा क्या सुना ? बच्चे बोले महाराज हम आज से नियम लेते हैं। हम अपने पापा को पापा नहीं पिताजी कहकर बुलाएंगे। मैंने कहा मेरा बोलना सार्थक हो गया। इसके बाद बच्चे बोले हम अपनी मम्मी को मम्मी नहीं बोलेंगे। मां बोलेंगे। बच्चों में ये संस्कार और बदलाव से मेरा यज्ञ सफल हो गया। महाराज ने कहा कि संबोधन बदलो तो संबंध बदल जाएंगे। इसलिए एक परिवार में रहो तो परिवार मजबूत होगा। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के साथ ही कई लोग मौजूद रहे।


