ग्राम पंचायतों के चौकीदार-भृत्य, रसोईया भोपाल पहुंचे:मंत्रियों के बंगलों से पहले शाहजहांनी पार्क में डेरा डाला

विभिन्न सरकारी विभागों में काम कर रहे अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारी पहली बार एकजुट नजर आ रहे हैं। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स एवं अस्थाई कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर भोपाल पहुंचे कर्मचारियों ने मंत्रियों के बंगलों से पहले शाहजहांनी पार्क में डेरा डाल दिया है। यहां मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कर्मचारियों को अपने हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ने को कहा। उन्होंने कहा कि नौकरी करते हुए भूखे मरने से अच्छा है, मंत्रियों के बंगलों पर बैठकर भूखे मरें। ये कर्मचारी आज तब तक मंत्रियों के बंगलों के सामने बैठेंगे, जब तक मंत्री उनकी बात सुनकर उन्हें उनका हक दिलाने का वादा नहीं कर लेते। प्रदेश की 23 हजार ग्राम पंचायतों के चौकीदार,पंप आपरेटर, भृत्य, सफाई कर्मी, स्कूलों, छात्रावासों के अंशकालीन भृत्य, रसोईया मंगलवार सुबह ही भोपाल पहुंच गए। जिससे गांवों में पानी सप्लाई, सफाई और छात्रावासों में रसोई का काम प्रभावित हुआ है। इन कर्मचारियों को पहले पोलीटैक्निक चौराहे पर इकट्ठा होना था, लेकिन प्रशासन से देर रात तक चली बातचीत के बाद शाहजहांनी पार्क में इकट्ठा होने की सहमति इस शर्त पर मिली कि वे कर्मचारियों की मुलाकात मंत्रियों से कराएंगे, जिन्हें ज्ञापन दिया जाएगा। इन कर्मचारियों का नेतृत्व डॉ.अमित सिंह, पंचायत चौकीदार संघ के अध्यक्ष राजभान रावत,दयाचंद वर्मा, नत्थूलाल कुशवाह, अनिल यादव, अंशकालीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उमाशंकर पाठक, मनोज उईके, मंजीत गोस्वामी, विजय तनखाने सहित अन्य पदाधिकारी कर रहे हैं। शाहजहांनी पार्क में इकट्ठा हुए अस्थाई कर्मचारियों की सरकार को दो टूक चेतावनी है कि 3-5 हजार में नौकरी करके भूखे मरने से बेहतर है भोपाल में मंत्रियों के बंगलों पर तब तक भूखे बैठे रहना, जब तक वेतनवृद्धि का आदेश नहीं हो जाता। शर्मा ने कहा कि पंचायतों के चौकीदार, पंप आपरेटरों, अंशकालीन कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया छुआछूत जैसा है, यह कर्मचारी 15-20 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एक बार भी सरकार के किसी मंत्री ने इनसे बातचीत नहीं की। कभी इनके प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए नहीं बुलाया, इनकी समस्याएं क्या हैं यह तक जानने की कोशिश नहीं की। जब सरकार ने इनकी समस्याएं सुनी ही नहीं, तब हल कैसे होंगी, आज कड़कड़ती ठंड में यह कर्मचारी मंत्रियों को अपनी व्यथा सुनाने आएं हैं और जब तक मंत्री इनकी बात सुन नहीं लेते, तब तक यह लोग यहीं डेरा डाले रहेंगे, चाहे ठंड में जान ही क्यों न चली जाए।

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