जिला प्रशासन अब निजी बिल्डर, डेवलपर्स द्वारा बनाए एलआईजी (निम्न आय वर्ग) और ईडब्ल्यूएस (कमजोर आय वर्ग) के प्लॉट बेचने खुद आवास मेला लगाने जा रहा है। मेला 21-22 दिसंबर को लालबाग में लगेगा। दावा है कि आवास मेला मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगाया जा रहा है। सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन को निजी बिल्डरों को यह मंच देने की क्या जरूरत पड़ी। आम आदमी के साथ किसी बिल्डर ने धोखाधड़ी की तो जवाबदार कौन होगा? आवास मेले के लिए क्रेडाई और नरेडको को नोडल एजेंसी बनाया है। मेले में 180 से ज्यादा स्टॉल लगेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट के भी स्टॉल होंगे। रेट क्या होंगे, यह बिल्डर ही तय करेंगे। ऐसे में प्रशासनिक नियंत्रण किस तरह होगा, सवाल इस पर भी है। दरअसल, कॉलोनी एक्ट के तहत निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस (3 लाख से कम आय) और एलआईजी (6 लाख से कम आय) वाले परिवारों को बसाना जरूरी है। लॉटरी से इन्हें प्रॉपर्टी आवंटित करनी होती है। पहली बार ये प्रॉपर्टी प्रशासन बिकवा रहा है, जिस पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर शहर के पुराने अनुभव को देखते हुए यदि बिल्डर-कॉलोनाइजर कुछ गड़बड़ करते हैं तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। दूसरा यदि प्रॉपर्टी के दाम बिल्डर ही तय करेंगे तो फिर प्रशासनिक दखल का क्या औचित्य है। सवाल यह भी नगर निगम और आईडीए की योजनाओं में भी इसी तरह के कई प्लॉट-फ्लैट भी खाली पड़े हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह के मामलों में पहले कभी भी प्रशासनिक स्तर पर ऐसे आयोजन नहीं हुए हैं। यदि ऐसा कुछ करना ही था तो किसी एजेंसी के माध्यम से भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती थी। आयोजन पर कॉलोनाइजर और बिल्डर भी सवाल उठा रहे हैं। सीधी बात- गौरव बैनल, अपर कलेक्टर ब्रांडिंग मकसद नहीं, कोशिश कमजोरों को प्लॉट दिलाना है Q. दोनों श्रेणी में आवास देना डेवलपर्स की जवाबदारी है। ब्रांडिंग प्रशासन क्यों कर रहा? A. ग्रामीण क्षेत्रों में इस श्रेणी के लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती। बिल्डर अपने स्तर पर यह दे देते हैं, इसलिए प्रशासन की मंशा है कि सब कुछ हमारे सामने हो। Q. रेट फिक्स रहेंगे या जो ज्यादा रेट डालेगा, उसे मिलेगा? A. बिल्डर अपनी लोकेशन के हिसाब से दाम तय करेंगे लेकिन आम आदमी के पास विकल्प होंगे तो उसे सस्ता आवास ढूंढने में आसानी होगी।


