निकाय चुनाव की रणभेरी बजते ही शहर के रिकॉर्डिंग स्टूडियोज में ‘चुनावी सुर’ गूंजने लगे हैं। इस बार प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए केवल वादों का सहारा नहीं ले रहे, बल्कि अपनी बात जनता के दिल तक पहुंचाने के लिए लोकल भाषाओं और मशहूर गानों की पैरोडी का सहारा ले रहे हैं। लालपुर व आसपास के इलाकों में बांग्ला व हिंदी गीत बन रहे, वहीं धुर्वा, नामकुम-हटिया में हिंदी, नागपुरी व भोजपुरी में। दुमका, जमशेदपुर में संथाली तो बोकारो, धनबाद में खोरठा में गीत बन रहे हैं। टकरा न जाए धुन, इसलिए बदली जा रही सिंगर्स की टीम रातू रोड स्थित श्री म्यूजिक स्टूडियो के संचालक और झॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार श्रीकांत इंदवार बताते हैं कि यदि एक ही वार्ड के दो प्रत्याशी आ जाएं, तो उनके लिए अलग-अलग सिंगर, उद्घोषक और तकनीशियन की टीम लगाई जाती है। वहीं, बुबाई रॉय ने बताया कि इलाके के अनुसार भाषा का चुनाव हो रहा है। ‘सस्ते’ के चक्कर में धोखा खा रहे प्रत्याशी : श्रीकांत इंदवार का कहना है कि अब हर मोहल्ले में कंप्यूटर लेकर बैठे लोग आधे दाम पर काम का दावा करते हैं, जिससे ऑडियो की क्वालिटी खराब होती है। कम लागत के चक्कर में कई बार प्रत्याशी ऐसे लोगों के झांसे में आकर अपना प्रचार खराब कर लेते हैं। इन कलाकारों की आवाज की डिमांड सिंगर्स में पवन रॉय, मनोज शहरी, इग्नेश कुमार, प्रीतम कुमार, मोनिका मुंडू, ज्योति साहू, धनंजय आजाद, सुधीर महली, पवन राणा, राजू केरकेट्टा व सुमन गुप्ता की भारी डिमांड है। गीतकारों में विजय प्रभाकर, केशव केसरिया, मंगल करमाली ‘जीत के मंत्र’ वाले शब्द लिख रहे हैं। पैरोडी सस्ती, ओरिजिनल का जलवा गानों का बाजार दो हिस्सों में बंटा है : पैरोडी : ₹2,000 से ₹4,000 तक। इसमें किसी हिट फिल्मी या एल्बम गाने की धुन पर प्रत्याशी के नाम के शब्द पिरोए जाते हैं। ओरिजिनल गाने ₹7,000 से ₹8,000 तक में बन रहे। इसमें नई धुन व नए संगीत का इस्तेमाल होता है।


